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    भटिंडा पट्टी में धान रोपाई ने की किसानों की जेब हलकी

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    महंगाई बढ़ने से बढ़े मजदूरों के रेट, धान रोपाई का 22 सौ से 24 सौ तक रेट

    • लेबर की कमी के कारण प्रवासी मजदूरों ने 200 से 300 रुपए तक बढ़ाए धान रोपाई के रेट

    भटिंडा (अशोक वर्मा)। भटिंडा क्षेत्र में इस बार धान की रोपाई के रेट बढ़ गए हैं और शुरू में ही खेतों में लेबर का संकट गहराने लगा है। 15 जून से एकदम खेतों में धान की रोपाई का काम तेज हो गया है। बहुत से किसानों ने 15 जून से पहले ही धान के लिए खेत तैयार कर लिए थे।

    प्रवासी मजदूरों ने लेबर संकट होने के कारण रोपाई के रेट में 200 से 300 रुपए तक का विस्तार कर दिया है। गांव महराज के किसान सुरजीत सिंह ने बताया कि प्रवासी मजदूर पहले किसानों के खेतों में रहने का इंतजाम देखते हैं और उसके बाद भाव खोलते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार लेबर का प्रति एकड़ 200 से 250 रुपए भाव बढ़ा है।

    इसी तरह ही गांव लैहरा के किसान गुरलाल सिंह ने बताया कि कम क्षेत्रफल वाले किसानों को लेबर का संकट है। उन्होंने बताया कि दूसरे प्रदेशों से आए मजदूर बड़े क्षेत्रफल को प्राथमिकता देते हंै। मौड़ इलाके के किसान लखवीर सिंह के अनुसार मौसम ठीक होने के कारण 15 जून को बिजली आठ घंटे मिली थी।

    उसके बाद में बंद हुई बिजली का किसानों की ओर से इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने माना कि किसान पिछड़ने के डर से धान की रोपाई के लिए जल्दबाजी करने लगे हैं। गांव महराज के किसान सतवंत सिंह ने बताया कि लेबर को अधिक कीमत के अलावा राशन भी देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रवासी मजदूरों के नखरे काफी ऊंचे हो गए हैं और वह काफी सुविधाएं मांगने लगे हैं।

    गांव कोठा गुरू के किसान जसबीर सिंह का कहना था कि धान की रोपाई में ज्यादा देरी होने के कारण धान की फसल पकने में दिक्कत आती है। उसने बताया कि धान की फसल अक्तूबर तक पकती नहीं जिस कारण नमी की मात्रा भी बढ़ जाती है।

    किसान नेता जसबीर सिंह बुर्जसेमा का कहना था कि बिजली की कटौती के कारण कृषि लागत बढ़ेगी, जिसका किसानों को ही नुकसान होना है क्योंकि उनको महंगे भाव का डीजल जलाना पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार 12 घंटे निर्विघ्न बिजली मुहैया करवाए जिससे किसानों को कोई दिक्कत न आए।

    धान की रोपाई निचला क्षेत्रफल घटा

    जिला कृषि अधिकारी भटिंडा डॉ. गुरांदित्ता सिंह ने बताया कि भटिंडा जिले में इस बार 1लाख 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य माना गया है। उन्होंने बताया कि बते वर्ष 1लाख 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई थी। उन्होंने बताया कि इस बार 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल धान, गवारे और अरहर नीचे से निकल गया है, जिसमें किसानों ने नरमे की बिजाई की है जो कि अच्छा शगुन है।

    महंगाई बढ़ने के कारण बढ़ी लेबर: सेवेवाला

    पंजाब खेत मजदूर यूनियन के जनरल सचिव लछमण सिंह सेवेवाला ने कहा कि सब तरफ महंगाई बढ़ी है और इसी हिसाब से लेबर में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि एकदम धान की रोपाई शुरू होने के कारण लेबर का संकट बनता है। उन्होंने कहा कि मांग और उपलब्धता के अंतर कारण भी भाव तेज होते हैं परंतु यह तेजी आरजी होती है। सेवेवाला ने कहा कि वास्तव में लेबर की अपेक्षा किसानी को कृषि वस्तुओं का महंगा होना ज्यादा प्रभावित करता है।

     गांवों में 2800 रुपए तक भी प्रति एकड़ का ठेका

    प्राप्त जानकारी के मुताबिक भटिंडा और मानसा जिलों में प्रति एकड़ 2500 से 2700 रुपए तक धान की रोपाई की लेबर ली जा रही है जबकि पिछले साल यह भाव 2200 से 2400 रुपए थे। वर्ष 2015 में भी भाव अधिक से अधिक 2400 और कम से कम 2200 रुपए थे। वर्ष 2014 दौरान धान की रोपाई 1800 से 2000 रुपए तक थी। कई गांवों में 2800 रुपए तक भी प्रति एकड़ का ठेका हुआ है।

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