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    Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने पहली बार दुनिया को दिखाई ब्रह्मास्त्र मिसाइल

    Republic Day 2026
    Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने पहली बार दुनिया को दिखाई ब्रह्मास्त्र मिसाइल

    Republic Day 2026: नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने पहली बार दुनिया को अपनी लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) की झलक दिखाकर यह साफ कर दिया कि भविष्य की जंग के लिए वह पूरी तरह तैयार है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित यह मिसाइल भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

    हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी में भारत की बड़ी छलांग | Republic Day 2026

    LRAShM एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) आधारित मिसाइल है। इसे पहले रॉकेट की मदद से ऊंचाई तक ले जाया जाता है, इसके बाद यह वायुमंडल में ग्लाइड करते हुए अनियमित और अप्रत्याशित रास्ते से अपने लक्ष्य तक पहुंचती है। यही खासियत इसे दुश्मन की रडार और एयर डिफेंस प्रणालियों के लिए लगभग अदृश्य और अपराजेय बना देती है।

    LRAShM की प्रमुख विशेषताएं

    • रेंज: लगभग 1500 किलोमीटर (भविष्य में 3000–3500 किमी तक बढ़ाने की योजना)
    • स्पीड: मैक 8 से मैक 10 तक (आवाज़ से 8–10 गुना तेज)
    • हमले का समय: दुश्मन जहाज को 15 मिनट से भी कम समय में निशाना बना सकती है
    • पेलोड: विभिन्न प्रकार के शक्तिशाली वारहेड ले जाने में सक्षम
    • लक्ष्य: युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म
    • भूमिका: मुख्य रूप से एंटी-शिप, भविष्य में लैंड-अटैक वर्जन भी संभव

    हिंद महासागर में भारत की पकड़ होगी और मजबूत

    यह मिसाइल खासतौर पर भारतीय नौसेना के लिए विकसित की जा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों और चीन की आक्रामक नौसैनिक मौजूदगी के बीच LRAShM भारत को रणनीतिक बढ़त देगी। हाइपरसोनिक गति के कारण दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम मिलेगा, जिससे समुद्री युद्ध में भारत की डिटरेंस क्षमता (निवारक शक्ति) कई गुना बढ़ जाएगी।

    हैदराबाद में हो रहा है अत्याधुनिक विकास

    LRAShM का विकास DRDO के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स, हैदराबाद में किया जा रहा है। भारत हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल तकनीक में लगातार तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

    चुनिंदा देशों की श्रेणी में भारत

    DRDO वैज्ञानिकों के अनुसार, हाइपरसोनिक मिसाइलें भारत के रक्षा भविष्य की रीढ़ हैं। LRAShM के साथ भारत उन चुनिंदा देशों—रूस, चीन और अमेरिका—की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास यह अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है।
    LRAShM केवल एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, सामरिक सोच और वैश्विक शक्ति बनने की दिशा का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में जब इसकी रेंज 3000–3500 किलोमीटर तक पहुंचेगी, तब यह सच में भारत का समुद्री ब्रह्मास्त्र साबित होगी।