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Thursday, April 2, 2026
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    कैसे करूं बयां तेरी रहमतों को…

    कैसे करूं बयां तेरी रहमतों को ,
    बदला कई जन्म नहीं चुका सकते।
    तेरे अहसान हम पर हैं करोड़ो ,
    अरबों – खरबों जन्म तक नहीं भुला सकते।

    तूने दर्द हमारे लेकर ,
    खुद कष्ट उठाए हैं।
    अश्रु पोंछ कर हमारे ,
    दीप मुस्कान के जलाये हैं ।
    अब रोशन है जिंदगी हमारी ,
    इन अहसानों को ।
    और बतला नहीं सकते ,
    कैसे करूं बयां तेरी रहमतों को ।
    बदला कई जन्म नहीं चुका सकते ।।

    msg

    नशा छुड़ा कर खुशहाल ,
    जिंदगी तुम कर रहे हो ।
    नशे में डूबी खलकत को ,
    जिन्दा कर रहे हो ।
    मरी इंसानियत जिन्दा देख ,
    सच ये नहीं झुठला सकते ।
    कैसे करूं बयां तेरी रहमतों को ,
    बदला कई जन्म नहीं चुका सकते ।।

    msg

    तड़पते इंसान आपने ,
    फिर बचाए हैं ।
    देकर प्यार अपना ,
    दर्द उनके सहलाये हैं ।
    आत्माएं उनकी ,
    शुक्राना तुम्हारा कर रही हैं ।
    नशे की कुरूपता से अब वो डर रही हैं ,
    इतने अहसानों को अब ।
    वो जतला नहीं सकते ,
    कैसे करूं बयां तेरी रहमतों को ।
    बदला कई जन्म नहीं चुका सकते ।।

    ख़ुशी के अश्रु हैं उनकी आँखों में ,
    हरदम यूँ ही वो रहमत चाहते हैं ।
    अब वो खुशहाल अपनी कहानी ,
    हमें हंसकर बताते हैं ।
    तूं दो जहां का मालिक ,
    खुशहाली सबके घरों में लाएगा ।
    जो है नास्तिक इस धरा पर ,
    आस्तिक उनको भी बनाएगा ।
    खेल तेरे मस्ताने ,
    किसी और को नहीं बता सकते ।
    कैसे करूं बयां तेरी रहमतों को ,
    बदला कई जन्म नहीं चुका सकते ।।

     कुलदीप स्वतंत्र

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