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    जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत: आर्थिक सर्वेक्षण

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    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2021-22 पेश करते हुए कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्?पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक रहा। समीक्षा में इस बात का भी उल्?लेख किया गया है कि चालू वित्?त वर्ष की पहली छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र में क्रमबद्ध सुधार भी दर्ज किया गया। इसमें कहा गया है कि 2021-22 की प्रथम छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र में कुल मिलाकर 10.8 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि हुई। वर्ष 2021-22 में समग्र सेवा क्षेत्र का जीवीए 8.2 प्रतिशत बढ़ने की आशा है। हालांकि, आर्थिक समीक्षा में इस बात पर विशेष जोर देते हुए कहा गया है कि कोरोना के ओमि?क्रॉन वैरिएंट के फैलने के कारण विशेषकर उन क्षेत्रों में निकट भविष्य में कुछ हद तक अनिश्चितता रहने की संभावना है जिनमें मानव संपर्क आवश्यक होता है।

    विश्व वाणिज्यिक सेवाओं के निर्यात में भागीदारी

    आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में सेवा क्षेत्र एफडीआई प्रवाह का सबसे बड़ा प्राप्?तकर्ता रहा है। वर्ष 2021-22 की पहली छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र को 16.73 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ है। वित्?तीय, व्?यापार, आउटसोर्सिंग, अनुसंधान एवं विकास, कुरियर, शिक्षा उप-क्षेत्र के साथ प्रौद्योगिकी परीक्षण एवं विश्?लेषण में एफडीआई अधिक रहा है। आर्थिक समीक्षा में इस बात को रेखांकित किया गया है कि वैश्विक सेवा निर्यात में भारत का प्रमुख स्?थान रहा। वर्ष 2020 में वह शीर्ष 10 सेवा निर्यातक देशों में बना रहा। विश्?व वाणिज्यिक सेवाओं के निर्यात में इसकी भागीदारी वर्ष 2019 में 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 4.1 प्रतिशत हो गई।

    समीक्षा में कहा गया कि व्?यापारिक निर्यात की तुलना में भारत के सेवाओं के निर्यात पर कोविड-19 प्रेरित वैश्विक लॉकडाउन का प्रभाव कम गंभीर था। परिवहन सेवा के निर्यात पर कोविड-19 के प्रभाव के बावजूद सॉफ्टवेयर निर्यात, व्यापार और ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं की सहायता की बदौलत सेवाओं के सकल निर्यात में दहाई आंकड़े में वृद्धि दर्ज की गई जिसके परिणामस्वरूप वित्?त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में सेवाओं के शुद्ध निर्यात में 22.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

    विकास एवं नवाचार के अगले स्तर तक पहुंचाएगा।

    आर्थिक समीक्षा में आईटी-बीपीएम सेवा को भारत के सेवा क्षेत्र के प्रमुख खंड के रूप में वर्णित किया गया है। नेस्?कॉम के अनुमान के अनुसार वर्ष 2020-21 के दौरान आईटी-बीपीएम राजस्व (ई-कॉमर्स के अतिरिक्त) वार्षिक 2.26 प्रतिशत बढ़कर 1.38 लाख कर्मचारियों को जोड़ते हुए 194 अरब डॉलर तक पहुंच गया। समीक्षा में कहा गया है कि आईटी-बीपीएम क्षेत्र के अंतर्गत आईटी सेवाओं की हिस्?सेदारी अधिक है। पिछले साल के दौरान अन्य सेवा प्रदाता विनियमों, दूरसंचार क्षेत्र के सुधारों और उपभोक्?ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 सहित क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए कई नीतिगत पहल की गई। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि इससे प्रतिभा तक अभिगम का विस्?तार होगा, रोजगार सृजन बढ़ेगा और इस क्षेत्र को विकास एवं नवाचार के अगले स्?तर तक पहुंचाएगा।

    समीक्षा में बताया गया है कि भारत में पिछले 6 वर्षों में स्टार्ट-अप की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें से अधिकांश स्?टार्ट-अप सेवा क्षेत्र से संबंधित हैं। 10 जनवरी 2022 तक 61,400 से ज्?यादा स्टार्ट-अप को मान्?यता दिया जा चुका है। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि भारत में 2021 में रिकॉर्ड 44 स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न स्थिति तक पहुंचे। इसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि बौद्धिक संपदा विशेषकर पेटेंट आधारित अर्थव्यवस्था की कुंजी है। भारत में दायर पेटेंट की संख्या 2010-11 में 39,400 से बढ़कर 2020-21 में 58,502 हो गई है और इसी अवधि के दौरान भारत में दिये गये पेटेंट 7,509 से बढ़कर 28,391 हो गए हैं।

    समीक्षा में कहा गया है कि सामान्यत

    जीडीपी वृद्धि, विदेशी मुद्रा आय और रोजगार में पर्यटन क्षेत्र का प्रमुख योगदान रहता है। हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण भारत सहित सभी जगहों पर वैश्विक यात्रा तथा पर्यटन को कमजोर करने वाला प्रभाव पड़ा है। आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन का पुन: आरंभ होना काफी हद तक यात्रा प्रतिबंधों, सामंजस्यपूर्ण सुरक्षा और सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा उपभोक्ताओं के विश्वास को बहाल करने में सहायता करने के लिए प्रभावी संचार के संदर्भ में देशों के बीच एक समन्वित प्रतिक्रिया पर निर्भर करता रहेगा। वंदे भारत मिशन के तहत विशेष अंतर्राष्?ट्रीय उड़ानें संचालित की जा रही हैं, जो वर्तमान में अपने 15वें चरण में है और 63.55 लाख यात्रियों को ले जा चुकी हैं।

    समीक्षा में कहा गया है कि बंदरगाहों का विकास अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। बंदरगाह आयात-निर्यात कार्गो का लगभग 90 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 70 प्रतिशत संभालते हैं। मार्च 2021 तक सभी बंदरगाहों की कुल कार्गो क्षमता बढ़कर 1,246.86 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) हो गई, जबकि मार्च 2014 में 1052.23 एमटीपीए थी। वर्ष 2020-21 में कोविड-19 के कारण उत्पन्न बाधाओं से प्रभावित होने के बाद अप्रैल-नवम्?बर 2021 के दौरान 10.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किये जाने के साथ वर्ष 2021-22 में बंदरगाह यातायात में भी वृद्धि हुई है। देश में बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देने के प्रति लक्षित सागरमाला कार्यक्रम का भी समीक्षा में उल्लेख किया गया है। वर्तमान में 5.53 लाख करोड़ रुपये की कुल 802 परियोजनाएं इस कार्यक्रम का अंग हैं।

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