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    लोगों के दिलों में रूहानियत की मिठास घोल रहा ‘चीकू वाला आश्रम’

    Shah Satnam Ji Alokik Dham

    शाह सतनाम जी अलौकिक धाम में चीकू व बेरी के बाग देखने दूर-दूर से आते है कदरदान

    • गुजरात ही नहीं मुंबई, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश व अन्य राज्यों में जाता है आश्रम का चीकू
    • डेरा सच्चा सौदा के इस आश्रम की सुंदरता का भी हर कोई है दीवाना

    भुज(सच कहूँ/विजय शर्मा)। राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर गुजरात राज्य के जिला भुज में सन् 2001 में डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा 20 एकड़ में बनाया गया ‘शाह सतनाम जी अलौकिक धाम’ (लाकड़िया) आज अपने चीकूओं की रूहानी मिठास लोगों के दिलों में इस कदर घोल चुका है कि अब देश के विभिन्न राज्यों में इसे ‘चीकू वाला आश्रम’ के नाम से जाना जाने लगा है।

    इतना नहीं इस आश्रम के बेरों का स्वाद भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। शाह सतनाम जी अलौकिक धाम के सौंदर्यकरण की बात करें तो यहां विभिन्न तरह के फूल जब सुबह की पहली किरण के साथ खिलते हैं तो प्राकृति की सुंदरता को ओर चार चांद लग जाते हैं। पक्षियों की चहचाहट जब कानों में पड़ती है तो ऐसा लगता है मानो कोई रूहानी संगीत बजा रहा हो। आश्रम में बने ‘तेरा वास’ को तो देखकर बार-बार सजदा करने का दिल करता है।

    आश्चर्यजनक है चीकू की बागवानी

    आश्रम के सेवादार गुरप्रीत सिंह इन्सां उर्फ हैप्पी ने सच कहूँ संवाददाता को जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिकों की माने तो जिस जमीन में खरा पानी होता है वहां किसी फसल की पैदावार का होना असंभव है। लेकिन इस आश्रम में 5 एकड़ में लगे 600 चीकूओं के पेड़ फलों से लदे हुए हैं। सेवादार हैप्पी इन्सां ने बताया कि इसके साथ ही डेढ़ एकड़ में 150 बेरी के पेड़ भी लगे हुए है। जबकि 6 से 7 एकड़ में मौसम के अनुसार फसलों का उत्पादन किया जाता है।

    उन्होंने बताया कि बागवानी व फसलों में खारे पानी से ही सिंचाई की जाती है। इसके बावजूद फसलों की पैदावार व चीकू और बेरी की मिठास इतनी है कि जो खाता है वो ये मानने को तैयार नहीं होता कि यहां खारे पानी से इतना मीठा चीकू हो सकता है। सेवादार हैप्पी इन्सां ने बताया कि सबसे हैरानी वाली बात तो ये है कि इस आश्रम के आस-पास बंजर जमीन है जहां दूर दूर तक कोई फसल या बागवानी नहीं है। ये ही धाम ऐसा है जहां चीकू और बेरी के पेड़ फलों से लदे पड़े हैं।

    चीकूओं को पकाने का अनोखा तरीका

    आश्रम में खेतीबाड़ी व बागवानी की देखरेख करने वाले सेवादार रिटायर्ड सूबेदार सुरजीत सिंह इन्सां ने बताया कि चीकूओं को तोड़ने के बाद उन्हें कैमिकल या मसाले में नहीं पकाया जाता है बल्कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा बताए गए टिप्स के अनुरूप पकाया जाता है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले चीकूओं को तोड़ा जाता है उसके बाद सेवादारों द्वारा साफ पानी में धो कर कुछ समय के लिए सुखाया जाता है।

    उसके बाद उन्हें एक कमरे में ले जाया जाता है जहां चार वाई चार फुट के एक बॉक्स में तिरपाल बिछाकर उस पर अखबार रखे जाते हंै, फिर चीकूओं को रखा जाता है और एक बार फिर अखबार की परत बनाई जाती है। अंत में चीकूओं को एक ओर तिरपाल से ढ़क कर रख दिया जाता है। जो 72 घंटों के अंतराल में पक जाते हैं।

    ‘तेरा वास’ के आगे बने कुएं के पानी से होती हैं सिंचाई

    आपको बता दें कि आश्रम में बने चीकूओं के बाग में उस कुएं के पानी से सिंचाई की जाती है जो ‘तेरा वास’ के मुख्य द्वार के बिल्कुल सामने बना हुआ है। सूबेदार सुरजीत सिंह ने बताया कि ये कुआं आश्रम निर्माण से पहले ही इस जमीन पर बना हुआ था। कुएं के पास ही पूज्य गुरु जी द्वारा ‘तेरा वास’ का निर्माण करवाया गया था, तब से ही इस कुएं के खारे पानी से ही बागवानी में सिंचाई की जा रही है।

    गुरु जी! आप जिस जमीन की तरफ हाथ करेंगे वो ही दिला देंगे

    2001 में भूंकप के दौरान जब डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां गुजरात में पीड़ितों की मद्द करने पहुंचे थे, इस दौरान बचाव कार्य में पूज्य गुरु जी के साथ जुटे लाकड़िया निवासी रफीक पुत्र शेर खान ने बताया कि उनके पिता को यहां खान साहब के नाम से जानते हैं एक दिन पूज्य गुरु जी ने उनके पिता से कहा कि हमे आश्रम निर्माण के लिए जमीन खरदनी है तो आप कोई जगह बताएं। तब मेरे पिता खान साहब बोले, गुरु जी आप जिस जमीन की तरफ हाथ करेंगे वो ही दिला देंगे। जिसके बाद पूज्य गुरु जी कई जगह जमीन देखने गए और अंत में इस जगह आकर रूके और वचन फरमाएं ‘हमें ये ही जमीन चाहिये। आश्रम निर्माण की नींव पूज्य गुरु जी ने अपने कर कमलों द्वारा रखी और यहीं सत्संग कर बड़ी संख्या में जीवों को ‘गुरुमंत्र’ दिया।

    2003 में ‘तेरा वास’ का निर्माण किया, तीन रूहानी सत्संग फरमाए

    रफीक पुत्र शेर खान ने बताया कि सन 2003 में पूज्य गुरु जी दोबारा गुजरात में आए और यहां 10 दिन रूके। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने तेरा वास का निर्माण करवाया व आश्रम की चार दीवारी की गई। इस दौरान पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने यहां तीन रूहानी सत्संग फरमाएं। पूज्य गुरु जी ने लोगों को नामदान दिया और बुराईयां छुड़वाकर इंसानियत व मानवता के मार्ग से जोड़ा।

    आश्रम को देखने आते हैं रेलवे अधिकारी

    आश्रम में 8 साल से सेवा कर रहे गुरप्रीत इन्सां (कोटपुरा, पंजाब) ने बताया कि अकसर आश्रम में समख्याली रेलवे विभाग के अधिकारी और दूर-दूर से प्रगतिशील किसान आते रहते हैं। आश्रम में आकर अधिकारी कहते हैं कि यहां आकर बहुत अच्छा लगता है मन को सुकून सा मिलता है आश्रम से जाने का दिल ही नहीं करता। वहीं किसान यहां बने चीकूओं के बाग का भ्रमण करते हैं और बागवानी की तकनीक को समझने का प्रयास करते हंै। लेकिन इस आश्रम के चीकू और बेर इतने मीठे कैसे है ये किसी को समझ नहीं आता।

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