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Saturday, February 7, 2026
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    हर घर में हों श्रवण कुमार, ऐसे हों हमारे संस्कार

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    गुरुग्राम की शिवपुरी में बेटे द्वारा माँ की हत्या की घटना निंदनीय

    • भविष्य में ना हो शिवपुरी कालोनी जैसी घटनाओं की पुनरावृति, करने होंगे प्रयास

    • अध्यात्म, संस्कृति, प्रकृति की ओर से युवाओं को ले जाना जरूरी

    सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम। जननी जने तो भक्त जन या दाता या शूर, नहीं तो जननी बांझ ही रहे काहे गंवाए नूर…। एक महिला कैसा पुत्र पैदा करे, यह बात इसी को केंद्र मानकर लिखी गई है। वैसे तो हर माँ-बाप ऐसा ही पुत्र पैदा करते हैं कि वह समाज में उनका नाम रोशन (Our Values) करे। उनका सहारा बनकर रहें। लेकिन गुरुग्राम की शिवपुरी कॉलोनी में अलग रह रहे बेटे को खाना देकर लौट रही एक माँ की बीच सड़क उसी बेटे द्वारा चाकूओं से निर्मम हत्या कर देना अत्यंत निंदनीय कृत्य है।

    इस तरह की घटनाओं पर सामाजिक चिंतक भी चिंतित हैं। उनका मानना है कि किसी भी स्थिति, परिस्थिति में हमारे अंदर इतनी नकारात्मकता नहीं आनी चाहिए कि हम अपनों का खून बहाने की सोच बैठें। सुख-दु:ख, सफलता-असफलता जीवन के साथ चलते हैं। कोई भी परिस्थिति सदैव एक सी नहीं रहती। इंसान का मनोबल मजबूत रहना चाहिए। सामाजिक चिंतक बोधराज सीकरी कहते हैं कि कहीं ना कहीं यह संस्कारों की कमी ही कही जाएगी कि एक बेटे द्वारा माँ की निर्मम हत्या कर दी जाती है। कलयुग के इस दौर में भी हर घर में श्रवण कुमार हों, ऐसी हमारी शिक्षा और संस्कार होने चाहिए।

    सीकरी कहते हैं कि हम सब जानते हैं कि कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। हमारे देश में भी लोगों के रोजगार छूटे हैं। इसी दौर में हमें बहुत से नए अवसर भी मिले हैं, जिन्हें अपनाकर हम आगे बढ़ सकते हैं। बोधराज सीकरी का कहना है कि बाकी सब चीजों के साथ हमें अब अपनी संस्कृति, संस्कारों (Our Values), प्रकृति और अध्यात्म को अपनाना जरूरी हो गया है। भागदौड़ भरी जिंदगी में इन सबके लिए समय निकालना बहुत जरूरी है।

    कोई भी काम हम अकेले सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते। बच्चों, युवाओं को मानसिक असंतुलन, अवसाद से बाहर निकालने को हम सबके सांझा प्रयास जरूरी हैं। महाभारत काल में भी श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन को गीता का संदेश देकर एक तरह से अवसाद से बाहर निकाला था। जीवन दर्शन उन्हें कराया था। बोधराज सीकरी का समाज के हर व्यक्ति को संदेश है कि हमारे पवित्र धार्मिक गं्रथों गीता, रामायण की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की जरूरत है। इससे घर में शांति, मानसिक शांति, काम-धंधे में बढ़ोतरी होने के साथ तमाम बाधाएं दूर होंगी।

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