बच्चों का पढ़ाई में मन लगाने के आसान उपाय

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Kids-Corner

यूं तो बच्चों का मन पढ़ाई में न लगना सामान्य है, लेकिन अगर यह समस्या अत्यधिक हो, तो माता-पिता के लिए चिंता का कारण भी बन जाता है। बच्चों की पढ़ाई को लेकर माता-पिता का चिंतित होना गलत भी नहीं है, क्योंकि हर पेरेंट्स अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं। इसी चाह में कई बार वे बच्चों के पढ़ाई में मन न लगने के कारण को समझ नहीं पाते हैं और उनपर दवाब बनाए रखते हैं। इसी का नतीजा होता बच्चों का चिढ़चिढ़ा होना और पढ़ाई से दूरी बना लेना। ऐसे में मॉमजंक्शन के इस लेख के जरिए हम न सिर्फ बच्चों का पढ़ाई में मन न लगने के कारणों पर गौर करेंगे, बल्कि बच्चों का मन पढाई में लगाने के उपाय भी बताएंगे। तो इस विषय में ज्यादा से ज्यादा जानकारी के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

बच्चों का मन पढ़ाई में नलगने के कारण

  • बच्चों का पढ़ाई में मन न लगने पर अक्सर मां-बाप उन्हें डांट-फटकार लगाते हैं। जबकि उन्हें सबसे पहले इस बात की वजह का पता लगाना आवश्यक है। बच्चे के न पढ़ने के पिछे कई कारण हो सकते हैं, जिसके बारे में हम आपको आज इस कॉलम में जानकारी दे रहे हैं।
  •  स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं।
  •  दिमाग तेज न होना।
  •  लर्निंग पॉवर का कमजोर होना।
  •  भावनात्मक समस्याएं (जैसे माता-पिता में झगड़े, किसी बात का डर)।
  •  घर का माहौल ठीक न होना।
  •  हाइपरएक्टिविटी डिसआॅर्डर (यह बच्चों में होने वाला सामान्य मानसिक विकार है। इसमें बच्चे में एकाग्रता की कमी देखी जा सकती है)।
  •  मनोरोग संबंधी विकार (जैसे एंग्जायटी, डिप्रेशन)।
  •  थकान और नींद पूरी न होना।
  •  पर्यावरणीय कारक (जैसे कमरे में पर्याप्त रोशनी या वेंटिलेशन न होना)।

बच्चों का मन पढ़ाई में लगाने के उपाय

बच्चे का मन बहुत ही कोमल और चंचल होता है। ऐसे में उनपर जोर-जबरदस्ती करके उनसे कुछ करवाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। खासतौर पर जब बात पढ़ाई की हो। ऐसे में बच्चों का पढ़ाई में मन लगाने के लिए आप नीचे बताए गए उपायों को अपना सकते हैं। बच्चों का मन पढ़ाई में लगाने के लिए यहां एक या दो नहीं, बल्कि 10 से भी ज्यादा उपाय हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:

बच्चे के प्रयास की सराहना करें

यदि बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, तो उसे डांटने की बजाय उसे समझाने की कोशिश करें। अगर वो कुछ गलती करे, तो उसे समझाएं। बच्चे को समय दें और उनके साथ बैठें व उनका होमवर्क कराने में उनकी मदद करें। बच्चे की छोटी-छोटी सफलता के लिए उनकी सराहना करें। साथ ही बच्चे को पढ़ाई के लिए अलग-अलग तरह से प्रेरित करें । उनके स्कूल में क्या चल रहा है, इस बारे में भी उनसे बात करें।

व्यायाम या योग

बच्चे की हेल्थ अच्छी होगी, तो वह पढ़ाई में पूरा मन लगा पाएंगे। डब्लूएचओ के अनुसार, एक्सरसाइज करने से बच्चे की पढ़ाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की बात सामने आई है। व्यायाम से एकाग्रता में भी सुधार हो सकता है। ऐसे में बच्चे के हेल्दी रूटीन में व्यायाम या योग को शामिल करना उचित विकल्प हो सकता है। हालांकि, व्यायाम या योग के लाभ के लिए बच्चे को किसी विशेषज्ञ की देख-रेख में ही व्यायाम या योग कराएं।

पढ़ाई के लिए सही जगह का चयन करें

बच्चों की पढ़ाई के लिए उनका अलग कमरा होना चाहिए। रिसर्चगेट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, बच्चे का पढ़ाई में मन लगे, इसके लिए उनके कमरे में सही वेंटिलेशन होना जरूरी है। वेंटिलेशन से हमारा मतलब यह है कि उनका कमरा हवादार होना चाहिए। इसके अलावा कमरे में सूरज की रोशनी और सही लाइट भी जरूरी है।

मानसिक विकास के लिए खेलना भी है जरूरी

पढ़ाई करने के साथ-साथ बच्चों के लिए खेलना भी उतना ही जरूरी है। इससे बच्चे का मानसिक विकास तेज हो सकता है। इसके साथ ही उनका मूड भी फ्रेश हो सकता है। ऐसे में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे के खेलने को भी पूरी अहमियत देना आवश्यक है। बच्चे के मानसिक विकास के लिए बोर्ड गेम्स या बाहर खेलने वाली चीजों का सहारा ले सकते हैं। जिस तरह माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई का समय निर्धारित करते हैं। ठीक उसी तरह उनके खेलने का समय भी तय कर दें। इससे बच्चे का मूड बेहतर होगा और पढ़ाई में भी उसका मन लगेगा।

मार-पीट करना गलत

कुछ पेरेंट्स बच्चे के मन लगाकार पढ़ाई न करने से उन पर चिल्लाना या मारना-पीट करना शुरू कर देते हैं। ऐसा करना बिल्कुल गलत है। इससे बच्चा डिप्रेशन में जा सकता है। इतना ही नहीं, हमने ऊपर पहले ही बता दिया है कि अवसाद का असर बच्चे की पढ़ाई पर भी हो सकता है। इसके अलावा, वे जिÞद्दी भी हो सकते हैं। ऐसे में डांटने की बजाय हमेशा बच्चे को प्यार से समझाएं। बच्चे के साथ पढ़ाई को लेकर किसी तरह की जोर जबरदस्ती न करें।

होमवर्क में बच्चे की मदद करें

बच्चों के होम वर्क में पेरेंट्स उनकी मदद कर सकते हैं। इससे भी बच्चा मन लगाकर पढ़ाई कर सकता है। एक शोध के अनुसार, जिन बच्चों को पढ़ाई में परिवार के लोग मदद करते हैं, वे जल्दी चीजों को याद कर सकते हैं। बच्चे के साथ पेरेंट्स भी पढ़ेंगे और उनके होमवर्क में मदद करेंगे, तो इसका सीधा असर बच्चों की परफॉर्मेंस पर नजर आ सकता है।

भावनात्मक सपोर्ट दें

बच्चों के कम नंबर आने पर उन्हें डांटने की बजाय मोटिवेट करें। उन्हें भावनात्मक सहयोग दें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ सकता है। किशोरावस्था में बच्चे के इमोश्नंस का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। कभी भी अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से न करें।

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