सरसा की बहू बनी किसानों के लिए रोल मॉडल

Sirsa News
Sirsa News : सरसा की बहू बनी किसानों के लिए रोल मॉडल

खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)। Agriculture News: ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है’ के कथन को सार्थक कर दिखाया है रानियां क्षेत्र के गांव चक्कां निवासी प्रियंका धर्मपत्नी इन्द्रसेन बरावड़ ने। प्रियंका एक साधारण व मध्यम वर्गीय परिवार की सदस्य है, जो अपने पति इन्द्रसेन के साथ लम्बे समय से परम्परागत खेती कर रही थी। लेकिन हर साल कम बारिश और भूमिगत लवणीय पानी के चलते नरमा, कपास व ग्वार जैसी खेती से केवल जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति ही बड़ी मुश्किल से हो पा रही थीे, उधर परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा था। इससे परेशान होकर प्रियंका ने पति इन्द्रसेन की सहमति से परम्परागत खेती छोड़कर सब्जी उगाने की ठानी। वर्तमान में प्रियंका मात्र एक एकड़ में आॅर्गेनिक सब्जी लगाकर नरमा व कपास से ज्यादा मुनाफा कमा रहा है। Sirsa News

प्रियंका ने बताया कि गांव के नजदीक उनके पास मात्र एक एकड़ जमीन है, जो पूर्णत: रेतीला टीला है, जहां पर भूमिगत पानी भी खारा व लवणीय है। पहले साल केवल भिंडी व कक्कड़ी की खेती की, जिससे तीन महीनों में 50 हजार रूपयों की बचत हुई। अच्छा मुनाफा देखकर उसका हौसला बढ़ गया और इस बार उन्होंने मिर्च, भिंडी, टिण्डी, कक्कड़ी, लोकी, तोरी व बंगा आदि सब्जी लगाई हुई है, जिनकी पैदावार शुरू हो चुकी है। Sirsa News

प्रियंका का मानना है कि अगर इस बार मौसम ने साथ दिया तो उन्हें मात्र छह महीनों में ही करीब सवा से डेढ़ लाख रूपये तक की पैदावार होने की उम्मीद है। हालांकि नई खेती का अनुभव ना होने के चलते उन्हें थोड़ी दिक्कत आ रही है। उन्होंने बताया कि सब्जियों में लगने वाली बीमारियों, पौधों की बढ़वार व पैदावार और देखरेख के तरीकों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। अगर समय रहते सही उपाय ना किया जाए तो बड़ा नुकसान का सामना भी करना पड़ता है।

ऑर्गेनिक व जहरमुक्त सब्जियों का स्वाद ही अलग | Sirsa News

प्रियंका के पति इन्द्रसेन ने बताया कि वे कृषि विभाग रानियां से समय-समय पर आॅर्गेनिक खेती की बढ़वार, पैदावार, देखरेख, बोने व काटने के नए तरीकों, समय परिवर्तन के साथ पड़ने वाली मौसमी बीमारियों व उनके रोकथाम के लिए की जानकारी लेते रहते हैं। जिसके लिए वह गौबर, गौमूत्र, नीम की पत्तियां, छाछ, हल्दी, गुड़ इत्यादि का मिश्रण बनाकर समय-समय पर छिड़काव करता है। जिससे सभी सब्जियां शुद्ध आॅर्गेनिक व विषमुक्त होती हैं।

खेतों से ही खरीदने पहुंच जाते हैं ग्राहक

ऑर्गेनिक होने के कारण सब्जी थोड़ी महंगी जरूर है, लेकिन ज्यादातर ग्राहक सब्जियां खेत से ही लेकर जाते हैं। जिसके लिए ज्यादा पैसा व मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। कई बार सब्जी की लागत कम व पैदावार अच्छी होने पर उन्हें रानियां, जीवन नगर, ऐलनाबाद या सिरसा सब्जी मंडी में बेचनी पड़ती हंै। जिससे समय, मेहनत व यातायात खर्च बढ़ जाता है।

कृषि क्षेत्र के लिए योजनाएं

यदि आपके पास खेती-बाड़ी करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो आप सरकार से सहायता ले सकते हैं। खेती के लिए सरकार कई योजनाओं के तहत किसानों को धन देती है। इन योजनाओं के तहत किसानों को लोन, सब्सिडी और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। Sirsa News

किसान क्रेडिट कार्ड: किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होता है। यह किसानों को खेती उपकरण, बीज, खाद, सिंचाई आदि की खरीदी के लिए सहायता प्रदान करता है।

फसल बीमा योजना: यह योजना किसानों को फसल के नुकसान की स्थिति में मुआवजा प्रदान करती है. यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, अदृश्य कारणों, और अन्य अज्ञात स्थितियों से होने वाली फसल की हानि के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। Sirsa News

राष्ट्रीय कृषि मिशन: राष्ट्रीय बागवानी मिशन ऐसी योजना है जिसके तहत किसानों को बागवानी फसलों की खेती करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। किसानों को राष्ट्रीय बागवानी मिशन का लाभ लेने के लिए अपने निकटतम कृषि विभाग में अप्लाई कर सकते हैं। Sirsa News

यह भी पढ़ें:– शिखर शिक्षा सदन के बच्चों ने मातृ दिवस पर बनाए सुन्दर कार्ड

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here