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    ‘गुरू के नूरी स्वरूप में करोड़ों सूरजों का प्रकाश हैं’

    सतगुरू जी के रूहानी नजारे

    प्रेमी रामफल इन्सां सुपुत्र श्री भगत राम आनंद पुरी कॉलोनी, नूरवाना रोड, लुधियाना (पंजाब)। प्रेमी जी अपने सुमिरन अभ्यास के दौरान सतगुरू के प्रत्यक्ष नूरानी दीदार तथा अन्य रूहानी नजारों के बारे में बताते हैं। प्रेमी जी लिखित में बताते हैं कि मैंने सन् 1994 में डेरा सच्चा सौदा में पूजनीय मौजूदा हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से नाम-शब्द (गुरूमंत्र) लिया है। प्रेमी जी लिखते हैं कि मैं पूज्य हजूर पिता जी के वचनानुसार सुबह 2 बजे ‘अमृत वेला पहर’ में सुमिरन करने के लिए उठ जाता।

    उपरोक्त घटना सन् 1998 की है। उस रात भी मैं दो बजे अपने नियमित अभ्यास के अनुसार उठकर सुमिरन करने बैठा हुआ था। करीब अढ़ाई बजे होंगे कि पहले तो मुझे आसमानी बिजली कड़कती हुई सुनाई दी। फिर एकदम तेज रोशनी आई और बहुत ही तेज व मनमोहक प्रकाश मुझे दिखाई दिया। वो प्रकाश इतना तेज था कि हजारों क्या, लाखों कह लीजिए या करोड़ों, यानि करोड़ों सूरजों का प्रकाश भी उस प्रकाश के मुकाबले फीका था। उपरान्त उस रोशनी में मुझे मेरे सतगुरू पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के हंसते-मुस्कुराते नूरानी स्वरूप के दर्श-दीदार हुए। इसके उपरांत अचानक मैंने देखा, पूज्य पिता जी लगभग 15 फुट ऊंचे एक किसी मकान की छत पर खड़े थे। पूजनीय शहनशाह जी मुझे इशारे से कह रहे थे कि आजा! आजा! पूज्य पिता जी ने दो-तीन बार ऐसे इशारे करके फरमाया। मैं भी पूज्य पिता जी के पीछे-पीछे हो लिया। पूज्य पिता जी ऊपर की ओर तेजी से चले जा रहे थे और मेरे को भी पीछे-पीछे आने को कह रहे थे कि आजा, आजा! और इस प्रकार पूज्य पिता जी मुझे अपने साथ कोसों किलोमीटर ऊंचाई पर ले गए। बहुत तेज रोशनी और बिजली कड़कने की आवाज से मुझे डर भी लग रहा था, परंतु पूज्य हजूर पिता जी के हुक्मानुसार मैं पीछे-पीछे ही चलता गया।

    आगे एक जगह मैंने देखा, पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज और पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज दोनों पवित्र बाडियां मूढे पर विराजमान थी। रूहानी बादशाह के दोनों नूरी स्वरूपों को पाकर मैं धन्य हो गया। हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे जैसा कि पूज्य हजूर पिता जी अक्सर फरमाया करते हैं और मेरी आंखों के सामने मैंने इस सच्चाई को देखा व नजदीक से अनुभव भी किया है। धन्य-धन्य है दाता, सतगुरू प्यारे मुर्शिद पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, आप जी का एक-एक वचन ज्यों का त्यों सच है। ऐ मेरे प्यारे मुर्शिद, हर पल आपजी के दर्श दीदार होते रहें और आखिरी स्वास भी आपजी की पवित्र याद व सेवा-सुमिरन में ही लगे जी, आपजी से यही दुआ है जी।

     

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