सेवा-सुमिरन ही इन्सान के सच्चे रिश्तेदार हैं
आप जी ने फरमाया कि साध-संगत बहुत बताती है कि सपने आदि में उनके साथ क्या हुआ और दर्शन हुए। क्योंकि मालिक, सतगुरु, दाता, रहबर पीर-फकीर के रूप में दर्शन तभी देते हैं जब संत उस मालिक से एक हो चुका होता है।
Sangaria: संकट में थी मरीज की जान, मौके पर पहुँच कर अजय इन्सां ने बचाई जान!
Blood Donation: संगरिया (...
पावन अवतार दिवस : पूज्य गुरू जी ने हजारों गायों के लिए भिजवाया हरा चारा और फीड
सरसा। (सच कहूँ न्यूज) डेर...


























