Anmol Vachan

सेवा-सुमिरन ही इन्सान के सच्चे रिश्तेदार हैं

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आप जी ने फरमाया कि साध-संगत बहुत बताती है कि सपने आदि में उनके साथ क्या हुआ और दर्शन हुए। क्योंकि मालिक, सतगुरु, दाता, रहबर पीर-फकीर के रूप में दर्शन तभी देते हैं जब संत उस मालिक से एक हो चुका होता है।

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