Lockdown: आपके द्वारा साझा किए गए समाचार में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में हुई तेजी और उसके असर पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया को विस्तार से बताया है। इसे संक्षेप में समझें तो मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल
- मूल्य वृद्धि: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं।
- वैश्विक असर:
- दक्षिण-पूर्व एशिया: 30%-50% बढ़ोतरी
- उत्तरी अमेरिका: 30%
- यूरोप: 20%
- अफ्रीका: 50%
इसका मतलब यह है कि दुनियाभर में ईंधन महंगा हो गया है।
2. भारत सरकार की नीति
- दो विकल्प:
- अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार भारतीय नागरिकों से भी पेट्रोल-डीजल महंगा करना
- अपने वित्त पर बोझ उठाकर कीमतों को स्थिर रखना
- चयन: मोदी सरकार ने वित्तीय बोझ उठाने का विकल्प चुना ताकि भारतीय उपभोक्ता महंगी ईंधन कीमतों से बच सकें।
3. वित्तीय उपाय
- पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये/लीटर, डीजल पर 30 रुपये/लीटर का नुकसान तेल कंपनियों को हुआ।
- सरकार ने इस नुकसान को कम करने के लिए:
- अपने राजस्व में भारी कटौती की
- निर्यात टैक्स लगाया ताकि विदेशी देशों को रिफाइनरी द्वारा ईंधन भेजने पर अतिरिक्त टैक्स लगे
4. लॉकडाउन और अफवाहों पर टिप्पणी
- हरदीप पुरी ने स्पष्ट किया कि कोई लॉकडाउन प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
- उन्होंने कहा कि अफवाहें फैलाना गैर-जिम्मेदाराना है।
- सरकार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ईंधन, ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित कर रही है।
सरकार अंतरराष्ट्रीय तेल संकट के बावजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक हित को प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए वित्तीय बोझ उठाना पड़ा, लेकिन ईंधन की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से जनता को बचाया गया।















