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    महाराष्ट्र: सुप्रीम कोर्ट ने 27 नवंबर को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया, प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने का आदेश

    Supreme Court
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    राकांपा-कांग्रेस ने सुनवाई के दौरान 154 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपने के लिए अर्जी लगाई थी

    Edited By Vijay Sharma

    नई दिल्ली(एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच विपक्षी दलों (शिवसेना, राकांपा-कांग्रेस) की याचिका पर मंगलवार सुबह 10:30 बजे  सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पढ़ना शुरू किया, कोर्ट ने सोमवार को डेढ़ घंटे सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। विपक्ष ने 24 घंटे में फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है। केंद्र की ओर से कहा गया कि फ्लोर टेस्ट सबसे बेहतर है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह 24 घंटे में ही हो। इस पर राकांपा-कांग्रेस के वकील ने कहा कि जब दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट चाहते हैं तो इसमें देरी क्यों हो रही है? राकांपा-कांग्रेस ने सुनवाई के दौरान 154 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपने के लिए अर्जी लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने इसकी इजाजत नहीं दी। इस पर विपक्षी दलों को हलफनामा वापस लेना पड़ा था।

    जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (केंद्र), कपिल सिब्बल (शिवसेना), अभिषेक मनु सिंघवी (राकांपा-कांग्रेस), मुकुल रोहतगी (देवेंद्र फडणवीस), मनिंदर सिंह (अजित पवार) ने दलीलें पेश की थीं। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के द्वारा राष्ट्रपति शासन हटाने और शपथ ग्रहण कराने के फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं करने की मांग की है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र में विपक्षी दल आगे की रणनीति तय करेंगे। उधर, उपमुख्यमंत्री अजित पवार को लेकर राकांपा प्रमुख शरद पवार फैसला ले सकते हैं। क्योंकि, सोमवार को राकांपा के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल अजित को मनाने के लिए गए थे। बाहर निकलकर भुजबल ने सिर्फ इतना ही कहा कि अजित से उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर वापस पार्टी में लौटने की अपील की है।

    सवाल सिर्फ इतना, बहुमत है कि नहीं

    कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से की जा रही आतिशी दलीलों पर कहा कि दोनों पक्ष मामले को बहुत विस्तृत करते जा रहे हैं जबकि कोर्ट के सामने सिर्फ सीमित मुद्दा इतना है कि सरकार को सदन का बहुमत प्राप्त है कि नहीं।

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