हमसे जुड़े

Follow us

11.5 C
Chandigarh
Sunday, January 18, 2026
More
    Home फटाफट न्यूज़ ई-सिगरेट पर प...

    ई-सिगरेट पर प्रतिबन्ध सराहनीय

    #E-cigarette, prohibition-on-e-cigarette-commendable

    मोदी सरकार ने ई-सिगरेट और ई-हुक्का पर बुधवार (18 सितंबर 2019) को प्रतिबन्ध लगा दिया। केंद्र सरकार ने ई- सिगरेट पर पाबंदी लगाकर सराहनीय निर्णय लिया है। इस निर्णय से उन ई- सिगरेट कम्पनियों के झूठे प्रचार को झटका लगेगा जो ई- सिगरेट के नुकसान रहित होने का प्रचार कर रही थी। इस विषय पर राष्ट्रपति की अनुमति से अध्यादेश पारित किया जाएगा। सरकारी बयान में कहा गया है कि अध्यादेश की घोषणा के बाद ई-सिगरेटों का किसी प्रकार का उत्पादन , विनिर्माण , आयात , निर्यात , परिवहन , विक्रय (आॅनलाइन विक्रय सहित ) ,वितरण अथवा विज्ञापन एक संज्ञेय अपराध माना जायेगा। इसमें अपराध के मामले में एक वर्ष तक कैद अथवा एक लाख रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों और अगले अपराध के लिए तीन वर्ष तक कैद और पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। ई-सिगरेटों के भंडारण के लिए भी 6 माह तक कैद अथवा 50 हजार रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों दंड दिए जा सकते है। विदित है कि इससे पहले ही 16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश अपने क्षेत्राधिकारों में ई-सिगरेट को प्रतिबंधित कर चुके है।

    गौरतलब है कि हाल के वर्षों में ई-सिगरेट पारंपरिक सिगरेट के एक विकल्प के रूप में उभरा है। ई-सिगरेट बैटरी चलित एक ऐसा उपकरण है, जो तरल निकोटीन, प्रोपीलीन ग्लाइकोल, पानी, ग्लिसरीन और फ्लेवर की मदद से सिगरेट पीने जैसा अनुभव देता है। सिगरेट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन टोबैको इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया (टीआइआइ) के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलिवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) को सामान्य भाषा में ई-सिगरेट कहा जाता है। वर्ष 2003 में एक चीनी व्यक्ति होन लिक ने ई-सिगरेट का आविष्कार किया था। वर्ष 2005 में इसकी बिक्री अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू की, जिसका नाम बाद में रूयान रखा गया। रूयान का अर्थ होता है- धूम्रपान के जैसा। ई-सिगरेट सिगार या पाइप जैसे धूम्रपान वाले तंबाकू उत्पादों का एक विकल्प है, जो तंबाकू के धुएं के समान स्वाद वाला होता है और वैसा ही अहसास देता है। इसका आंतरिक आकार लंबी ट्यूब के समान या पेन की तरह होता है, जबकि बाहरी स्वरूप वास्तविक धूम्रपान उत्पादों जैसे सिगरेट, सिगार और पाइप जैसा होता है। ई-सिगरेट के उपकरण का फिर से उपयोग किया जा सकता है। इसके भागों को बदला या फिर से भरा भी जा सकता है।

    वर्तमान में तो यह व्यवसाय 2-3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। देश-विदेश में ई-सिगरेट के 460 तरह के ब्रांड मौजूद हैं व धड़ल्ले से बिक भी रहे हैं जो निकोटीन की अलग-अलग मात्रा देने के हिसाब से डिजाइन किए गए हैं। जाहिर है, इसकी प्रवृत्ति धूम्रपान के आदी व्यक्तियों में तेजी से बढ़ रही है। धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में ई-सिगरेट के प्रति आकर्षण बढ़ने का कारण इसका दुष्प्रचार है। ऐसे नए उत्पाद आकर्षक रूपों व विविध सुगन्धों से युक्त होते है और इसका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। विकसित देशों में विशेषकर युवाओं और बच्चों में इसने एक महामारी का रूप ले लिया है।
    सिगरेट सेवन करने वालों के मध्य इस भ्रांति को फैलाया गया है कि ई-सिगरेट के सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। जबकि अब तक सिगरेट का सेवन करने वाले लोग इस बात से वाकिफ थे कि सिगरेट से कैंसर, फेफड़ों से संबंधी रोग, श्वसन तंत्र पर बुरा प्रभाव जैसी समस्याएं होती हैं। सिगरेट में पाए जाने वाले निकोटीन का प्रभाव सिगरेट पीने के चालीस मिनट बाद भी रहता है। इसलिए इस भ्रांति को फैलाया गया गया कि सिगरेट की तुलना में ई-सिगरेट हानिरहित है। इस भ्रांति ने ई-सिगरेट के व्यवसाय को वैश्विक रूप से समृद्ध बना दिया और अपने दैनिक जीवन में धूम्रपान को जीवन शैली का हिस्सा बना चुके लोग स्वत: इस ओर आकर्षित होते चले गए।
    यह मनोविज्ञान है कि नकली सिगरेट पीने वाला फिर असली सिगरेट पीने की भी इच्छा बढ़ाता है। ई- सिगरेट का एक घातक पहलू यह भी है कि नई पीढ़ी इसे ‘ स्टेटस सिंबल ‘ के रूप में प्रयोग करने लगी है जिसे रोकना और भी मुश्किल हो रहा है। शुरूआत में लोग इसका सेवन केवल दिखावे के लिए करते हैं, लेकिन कब इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं, पता भी नहीं चलता। एक बार गिरफ्त में आने के बाद वे ई-सिगरेट से सामान्य सिगरेट की तरफ मुड़ जाते हैं।

    दरअसल , विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसी वर्ष जारी अपनी रिपोर्ट में पूरे विश्व को चेतावनी दी थी कि ई- सिगरेट कम्पनियों के प्रचार पर विश्वास न करें । संगठन ने यह भी खुलासा किया था कि सिगरेट उद्योग तम्बाकू विरोधी अंतरराष्ट्रीय मुहिम को नाकाम बनाने में लगा हुआ है। लम्बे समय से यह बहस चल रही है कि ई-सिगरेट नुकसानदायक है या नहीं। लेकिन यह साफ है, धूम्रपान के कारण लाखों लोग वैश्विक स्तर पर असमय ही काल-कवलित हो रहे हैं।

    अत: कानून के साथ – साथ सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है। लोगों को इससे होने वाले दुष्प्रभावों से अवगत कराना होगा जिससे इस पर पूरी तरह लगाम कसी जा सके। बहरहाल , सरकार का यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है। लेकिन यह प्रयास यहीं न रुके बल्कि हमें देश को पूर्णतया धूम्रपान व नशे से मुक्त करने की ओर कदम बढ़ाना है क्योंकि विश्व स्वास्थ संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार धूम्रपान की वजह से हर साल लगभग साठ लाख लोग मारे जा रहे हैं तथा अगर ऐसा ही चलता रहा तो वर्ष 2030 में प्रति वर्ष धूम्रपान की वजह से मारे जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर अस्सी लाख हो जाएगी। अत: हमें यह समझना होगा कि तम्बाकू समाज के माथे पर कलंक है जिसे मिटाने के लिए ई- सिगरेट का सहारा लेना ही गलत है। नि:सन्देह इससे सरकार को वितीय नुकसान तो होगा लेकिन देश के नागरिकों के स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नहीं है।

    -रीतेन्द्र कंवर शेखावत

     

    Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करे।