तालिबान ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, कहा-हम कश्मीर के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे

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Taliban vs Kashmir

नई दिल्ली (सच कहूँ डेस्क)। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी हो चुकी है। अब अफगानिस्तान में तालिबान नई सरकार का गठन करने वाला है। इस बीच तालिबान ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। तालिबानी नेता अनस हक्कानी ने कहा कि हम कश्मीर के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। किसी एक निजी चैनल से बातचीत करते हुए तालिबानी नेता अनस हक्कानी ने कहा कि कश्मीर हमारे अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और हस्तक्षेप नीति के खिलाफ है। हम अपनी नीति के खिलाफ कैसे जा सकते हैं? इसलिए यह स्पष्ट हे कि हम कश्मीर में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उधर भारत ने भी तालिबान से बात करनी शुरू कर दी है।

तालिबान को मान्यता देने की जल्दबाजी नहीं: अमेरिका

अमेरिकी सरकार और अंतरर्राष्ट्रीय समुदाय तालिबान को अफगानिस्तान की वैध सरकार के रूप में मान्यता देने की जल्दबाजी में नहीं है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने यह बात कही। सुश्री साकी ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, ‘किसी भी अन्य परिस्थिति की तरह यह हालात पर निर्भर करेगा। अमेरिकी सरकार और अंतरर्राष्ट्रीय समुदाय मान्यता देने की जल्दबाजी में नहीं है।

गुटेरेस ने जतायी अफगानिस्तान में समावेशी सरकार गठन की उम्मीद

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आतंकवादी संगठन तालिबान से अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद देश में एक समावेशी सरकार बनाने, मानवाधिकारों का पूरी तरह से सम्मान करने और यह सुनिश्चित करने की उम्मीद जतायी है कि अफगानिस्तान का उपयोग आतंकवादियों को आश्रय देने के लिए नहीं किया जायेगा। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजार्रिक ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘ तालिबान के लिए गुटेरेस का संदेश… वह देखना हैं कि एक समावेशी सरकार का गठन हो, अफगानिस्तान के मानवाधिकार दायित्वों के लिए पूर्ण सम्मान हो, खासकर महिलाओं के मामले में और यह सुनिश्चित किया जाये कि पिछले दो दशक में हासिल किये गये लाभ व्यर्थ नहीं हों तथा यह भी सुनिश्चित किया जाये कि अफगानिस्तान का इस्तेमाल आतंकवादियों के ठिकाने के रूप में नहीं किया जाये।

प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, जो देश में 60 से अधिक वर्षों से मौजूद है, अमेरिका और अन्य विदेशी बलों की वापसी के बाद भी अफगान लोगों के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र आंतरिक रूप से विस्थापित अफगानों की स्थिति और तालिबान के कब्जे के बाद देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में व्यवधान के बारे में चिंतित है।

 

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