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    Haryana: हरियाणा के इस जिले का तहसीलदार सस्पेंड, कारनामे ऐसे सुनते ही होश उड़ जाएं…

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    Haryana: हरियाणा के इस जिले का तहसीलदार सस्पेंड, कारनामे ऐसे सुनते ही होश उड़ जाएं...

    Haryana: सच कहूँ /कुलदीप नैनकैथल | रिश्वत मामले में फंसे गुहला के तहसीलदार मंजीत मलिक को निलंबित करने के आदेश सरकार ने गुरूवार को जारी कर दिए। रिश्वतखोरी के आरोप में मलिक पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था। इस दौरान एसीबी ने क्लर्क को तो पकड़ा लिया था, लेकिन इसकी भनक लगते ही तहसीलदार फरार हो गया था जो अब तक फरार ही चल रहा है। कुछ दिन पहले ही एसीबी ने आरोपी तहसीलदार पर इनाम घोषित किया था। वहीं इनाम घोषित होने के बाद इसी हफ्ते मंजीत का ट्रांसफर गुहला से तोशाम में कर दिया गया था। लेकिन अब आरोपी को सस्पेंड कर दिया गया है

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    रजिस्ट्री के नाम पर क्लर्क और तहसीलदार लेते थे रिश्वत

    चीका के वार्ड-3 के रहने वाले विजय कुमार ने चीका की अमर सिटी कॉलोनी में 151 गज का एक प्लॉट खरीदा था। वह अपनी भाभी के नाम पर इस प्लॉट की रजिस्ट्री करवाना चाहता था। विजय तहसीलदार के पास गया तो उसने कहा कि कागजात ठीक हैं। इस पर 10 रुपए की टिकट लगाकर रजिस्ट्री करा लो। जब उसने क्लर्क को पूछा कि 10 रुपए की कौन सी टिकट लगनी है तो क्लर्क ने कहा- 10 रुपए की टिकट का मतलब 10 हजार रुपए है। लेकिन विजय ने देने से मना कर दिया | जिसके बाद तहसीलदार ने कहा कि इस खेवट पर स्टे है। इसकी रजिस्ट्री नहीं होगी। तहसीलदार ने बिना कोई कारण बताए उसका रजिस्ट्री का टोकन रद्द कर दिया।

    विजय ने खेवट से संबंधित सारे कागजात चेक किए तो देखा कि उस पर कोई स्टे नहीं है। वह 6 फरवरी 2025 को फिर तहसीलदार से मिला और कहा कि खेवट पर कोई स्टे नहीं है।इसके बाद वह क्लर्क प्रदीप के पास गया तो उसने रजिस्ट्री के लिए नकद 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। इससे परेशान विजय ने एसीबी को शिकायत कर दी। इस दौरान एसीबी ने रजिस्ट्री क्लर्क को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया और तहसीलदार पर भी मामला दर्ज कर लिया गया |

    फरार तहसीलदार पर रखा हुआ है इनाम

    जब क्लर्क प्रदीप को पकड़ा गया तो उस वक्त तहसीलदार सीवन नगर पालिका चुनाव में सहायक रिटर्निंग अधिकारी (एआरओ) और नोडल अधिकारी तैनात था। एसीबी की कार्रवाई का पता चलते ही तहसीलदार चुनावी ड्यूटी बीच में ही छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद कई महीनो बाद भी तहसीलदार का कोई पता नहीं लगा | एसीबी की तरफ से अब तहसीलदार का पता बताने वाले को 20 हजार रुपए देने तक का ऐलान किया गया है।