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Thursday, April 9, 2026
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    पक्षियों की सभा और चतुर कौवा

    Crow
    Crow: पक्षियों की सभा और चतुर कौवा

    कोमल सांखला। Crow: एक घने जंगल में, जहाँ सूरज की किरणें पत्तियों के बीच से छन-छनकर आती थीं और हवा मधुर गीत गुनगुनाती थी, पक्षियों का एक खुशहाल परिवार रहता था। सफेद हंस अपनी गरिमा से तालाबों को सुंदर बनाता, रंगबिरंगा तोता चहक-चहककर सबको हँसाता, धैर्यवान बगुला शांत खड़ा विचार करता, कोयल अपनी मीठी कूक से वसंत बुलाती, चातक बादलों की राह देखता, कोमल कबूतर शांति का पैगाम देता, मुर्गा सुबह का स्वागत करता और गंभीर उल्लू रात में जागकर पहरेदारी करता।

    उनके शक्तिशाली राजा गरुड़ भगवान विष्णु की सेवा में इतने व्यस्त रहते कि छोटे-छोटे पक्षियों की रोज की परेशानियाँ — जैसे शिकारी जानवरों का डर, भोजन की तलाश या आपसी झगड़े — उन्हें दिखाई ही नहीं देते। धीरे-धीरे पक्षी बेचैन हो गए। एक दिन उन्होंने फैसला किया, ाअब हमें एक नया राजा चुनना चाहिए जो हमारे बीच रहे, हमारी बात सुने और हमारी मुश्किलें दूर करे।’

    वे एक विशाल पीपल के नीचे इकट्ठे हुए। कई दिनों तक चर्चा चली। आखिरकार सबकी राय एक हो गई — उल्लू को राजा बनाया जाए! उसकी बड़ी-बड़ी आँखें, गंभीर चेहरा और रात की तीखी नजर उन्हें बहुत प्रभावित कर गई थी। Crow

    राज्याभिषेक की धूमधाम शुरू हो गई। दूर-दूर से पवित्र जल लाया गया। सिंहासन को चमकते रत्नों और फूलों से सजाया गया। स्वर्ण कलशों में सुगंधित पानी भरा गया। पक्षी मंत्र पढ़ने लगे और पूरा जंगल उत्सव में डूब गया। उल्लू गर्व से सिंहासन की ओर बढ़ रहा था, उसकी आँखों में राजा बनने का सपना चमक रहा था। ठीक उसी पल, जब अभिषेक होने वाला था, अचानक एक काला-चमकदार कौवा वहाँ आ पहुँचा। उसने भव्य तैयारी देखी तो हैरान रह गया। पक्षी भी उसे देखकर चौंक गए  इसे तो किसी ने बुलाया भी नहीं था!’ कौवा बहुत चतुर था। वह शांत लेकिन मजबूत आवाज में बोला, मित्रों! रुक जाओ! तुम उल्लू को राजा बना रहे हो? सोचो तो जरा… यह तो सिर्फ़ रात में अच्छे से देख पाता है। दिन के तेज उजाले में इसकी आँखें धुंधली हो जाती हैं। अगर कोई शत्रु दिन में हमला कर दे, तो यह क्या करेगा? अंधा होकर छिप जाएगा? क्या हमारी प्रजा का भला ऐसे राजा से होगा?’ पूरी सभा सन्न रह गई। पक्षी सोच में पड़ गए। उल्लू का गुस्सा फूट पड़ा। उसने लाल आँखें करके कौवे को घूरा और गरजकर कहा, ाकौवे! तूने मेरे राज्याभिषेक में बाधा डाली है। अगर आज यह समारोह रुक गया, तो मैं तुझे और तेरे पूरे परिवार को कभी नहीं भूलूंगा और कभी माफ नहीं करूंगा!’

    कौवा हँसा और बोला, मैंने तो सिर्फ़ सच कहा है, मित्र। क्रोध मत करो।’ कहकर वह अपनी कर्कश आवाज में हँसता हुआ आसमान में उड़ गया। अभिषेक अधूरा रह गया। पक्षी बिना नए राजा के अपने घोंसलों को लौट गए, मन में नई उलझन लिए। उसी दिन से उल्लू और कौवों के बीच गहरा दुश्मनी का बीज बो दिया गया। अब रात में उल्लू कौवों पर हमला करता है, और दिन में कौवे उल्लुओं के घोंसलों को तोड़-फोड़ देते हैं। यह बैर आज भी जंगल में जारी है।

    सीख: जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला कभी न लें। दूसरों की सलाह सुनना और सोच-समझकर विचार करना हमेशा फायदेमंद होता है। कभी-कभी कड़वी सच्चाई हमें बड़ी गलती से बचा लेती है। Crow