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    रामनाम का बजाया डंका, छुड़ाई बुराइयां

    Shah Satnam Ji Maharaj

    पूजनीय परम पिता जी ने डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही के रूप में गद्दीनशीन होकर लगभग 30 वर्षों तक साध-संगत की सेवा संभाल की। आप जी ने साध-संगत को हक-हलाल की करके खाना, किसी का दिल न दुखाना व बुराइयों से दूर रहकर मालिक-प्रभु की सच्ची भक्ति करने, मालिक का नाम जपने और इंसानियत की सेवा में समय लगाना, सच के रास्ते पर दृढ़ता से चलने का साध-संगत को पाठ पढ़ाया। आप जी ने बेसहारों को सहारा प्रदान करके उन्हें सामाजिक घृणा का शिकार होने से बचाया और अच्छे नागरिक होने का अधिकार उन्हें वापिस दिलवाया।

    आप जी ने प्रचलित बाहरी दिखावा, रूढ़िवादी प्रथाओं का खंडन किया। आप जी ने सीधी-सादी लोक प्रचलित भाषा में राम-नाम का प्रचार किया। घर-परिवार व समाज के हर कार्य में संयम बरतने, सीमित परिवार में रहकर बच्चों की अच्छी तरह से देखभाल करना, उन्हें अच्छी शिक्षा देकर बुराइयों से रोककर प्रभु-भक्ति में लगाना आप जी का संदेश रहा। आप जी ने 11 लाख लोगों को नाम की अनमोल दात प्रदान करके नशों व अन्य बुराइयों से बाहर निकाला। आप जी ने कई ग्रंथों व भजनों की रचना की जिनकी भाषा इतनी सरल, साधारण है कि कोई भी साधारण व्यक्ति पढ़कर समझ सकता है।

    ‘‘बेटा। आप तो सबकुछ पा गए जब तार ही मालिक से जुड़ गई तो पीछे क्या रह गया।’’

    जून 1967 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव केले बांदर (आजकल नसीबपुरा) जिला बठिंडा में सत्संग फरमाने के लिए पधारे। पूरा गांव सत्संग की खुशी में फूले नहीं समा रहा था। इस गांव में उस समय 317 व्यक्तियों को आप जी ने नाम की अनमोल दात प्रदान की। साध-संगत के प्रेम व नाम शब्द लेने वालों का उत्साह देखकर पूजनीय परम पिता जी बेअंत खुश हुए व वचन फरमाए ‘‘बेटा, आपके गांव का पहला नंबर है।’’ पूजनीय परम पिता जी ने गांव के बारे में वचन फरमाए, ‘‘बेटा, यह तो नसीबों वाला नगर है।’’

    परम पिता जी ने सत्संग में चल रही कव्वाली में एक और तुक जोड़ दी- ‘‘पिंड तर गिया नसीबपुरा सारा, गुरू दे नाल तार जोड़ के।’’ एक प्रेमी भाई ने पूजनीय परम पिता जी के आगे अरदाज की कि, ‘‘पिता जी’’ हमारी प्रेम रूपी तार आप जी के चरणों के साथ हमेशा जुड़ी रहे। तब पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा। आप तो सबकुछ पा गए जब तार ही मालिक से जुड़ गई तो पीछे क्या रह गया।’’ यह वचन सुनकर सारी साध-संगत खुशी से नाच उठी।

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