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    खेल में बेटे और पोतों को पीछे छोड़ रहे ये बुजुर्ग

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    अब साउथ कोरिया में होने वाली एशिया पैसिफिक मास्टर्स गेम्स में खेलेंगे

    नारायणगढ़ (सच कहूँ/सुरजीत)। गाँव भारांपुर के रेशम सिंह (73) ने चौथी नेशनल मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप 2023 में ट्रिपल जम्प में रजत पदक जीत कर गाँव व प्रदेश का नाम रोशन किया। रेशम सिंह अब साउथ कोरिया में आयोजित होने वाली एशिया पैसिफिक मास्टर गेम्स में खेलेंगे। बता दें कि चौथी नेशनल मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप 2023 जोकि 16 से 19 फरवरी 2023 तक कुरुक्षेत्र के द्रोणाचार्य स्टेडियम में आयोजित हुई थी। ट्रिपल जम्प की 70 प्लस की प्रतियोगिता में बुजुर्ग रेशम सिंह ने 6.59 मीटर जम्प करके दूसरा स्थान प्राप्त कर रजत पदक जीतने में सफलता प्राप्त की है।

    इससे पूर्व भी रेशम सिंह ने नवम्बर 2022 में 31वीं हरियाणा मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप में भी ट्रिपल जम्प प्रतियोगिता में 6.55 मीटर जम्प कर प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। यह प्रतियोगिता हरियाणा मास्टर्स एथलेटिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित की गई थी। रेशम सिंह ने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए जहां 31वीं हरियाणा मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप में 6.55 मीटर जम्प किया था, वहीं अब चौथी नेशनल मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप 2023 में ट्रिपल जम्प में 6.59 मीटर जम्प किया है। रजत पदक जीत कर गांव लौटने पर ग्रामीणों एवं क्षेत्रवासियों ने रेशम सिंह का भव्य स्वागत किया।

    रोजाना दौड़ व व्यायाम है नियम

    रजत पदक विजेता रेशम सिंह ने अपनी जीत का श्रेय अपने परिजनों को देते हुए कहा कि वे प्रतिदिन दौड़ लगाते हैं। सुबह के समय व्यायाम करते हैं और सायं के समय गाँव के युवा खिलाड़ियों के साथ फुटबाल खेलते हैं। दिलचस्प बात यह है कि गाँव की फुटबाल टीम में रेशम सिंह के परिवार के पांच सदस्य खेलते हैं, जिनमें रेशम सिंह के दो पुत्र कुलदीप सिंह (53) तथा रणदीप सिंह (49) व उनके पौत्र धर्मवीर एवं कर्मवीर शामिल हैं।

    खान-पान पर देते हैं विशेष ध्यान

    किसान रेशम सिंह बताते हैं कि वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। वे अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देते हैं। अपने खेत में ही बिना रासायनिक खाद का प्रयोग किए सब्जियां एवं फल तथा अनाज का उत्पादन करते हैं। दूध, दही, घी तथा तीनों समय लस्सी का सेवन करते हैं। मैट्रिक पास रेशम सिंह ने बताया कि उनकी शुरू से ही खेलों में रुचि रही है। वे फुटबाल, वॉलीबाल, गोला फेंकना, भाला फेंकना, कबड्डी, डिस्कश थ्रो आदि गेम्स खेलते रहे हैं। वे बताते हैं कि आज भी वे अपने पशुओं का चारा हाथ की मशीन से परिजनों के साथ मिलकर काटते हैं, जिससे व्यायाम भी हो जाता है और बिजली की बचत भी होती है। रेशम सिंह ने युवाओं को संदेश दिया है कि वे नशे से दूर रहे और खेलों में अवश्य भाग लें। दूध, दही, लस्सी का नियमित रूप से सेवन करें और जंक फूड से दूर रहे।

    परिवार के सदस्यों को गर्व

    रेशम सिंह के पुत्र कुलदीप सिंह, रणदीप सिंह व पौत्र धर्मवीर और कर्मवीर अपने बुजुर्ग रेशम सिंह पर गर्व करते हुए कहते हैं कि जिस उम्र में लोग डॉक्टरों के पास चक्कर लगाते हैं उस आयु में हमारे पिता व दादा मैडल जीत कर गाँव व प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं, जिससे उन्हें भी प्रेरणा मिलती है कि वे भी खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़कर नाम कमाएं। कुलदीप सिंह ने कहा कि अब उनके पिताजी साउथ कोरिया में आयोजित होने वाली एशिया पसिफिक मास्टर्स गेम्स में भाग लेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वे वहां भी वे बढ़िया खेल के माध्यम से देश का नाम अर्न्तराष्ट्रीय पटल पर चमकाएं।

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