Param Pita Shah Satnam Ji: 2 फरवरी 1976, पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज गांव हठूर जिला लुधियाना में सत्संग फरमाकर गांव दीवाना की तरफ जा रहे थे। थोड़ी दूर जाने के बाद ड्राईवर रास्ता भूलकर गांव छीनीवाल वाली सड़क पर चल पड़ा। जब गांव के बाहर पहुंचे तो एक आदमी रास्ते में हाथ जोड़कर खड़ा था। पूजनीय परम पिता जी ने ड्राईवर को फरमाया, ”मोहन सिंह, गाड़ी रोको! जब गाड़ी रुकी तो उस आदमी ने विनती की, महाराज जी! मैं तो दो घंटों से यहां खड़ा हूं कि यहां महाराज जी आएंगे और मैं दर्शन करूंगा व आपजी को दूध पिलाऊंगा। मेरी दिल की इच्छा पूरी हो गई है। MSG BHANDARA Month
आप धन्य हो। ”पूजनीय परम पिता जी ने आशीर्वाद देते फरमाया, ” तेरा प्रेम ही हमें यहां खींच लाया है। जाना तो हमने गांव दीवाने था, लेकिन प्रेम ने रास्ता ही भुला दिया।” फिर फरमाया, ”अब दूध भी ले आ।”उस आदमी ने दूध का गिलास पहले पूजनीय परम पिता जी को दिया और फिर सभी सेवादारों को, जो परम पिता जी के साथ थे। पूजनीय परम पिता जी ने दूध पीते हुए फरमाया,”अब आप नाम-शब्द भी ले लेना।” उस आदमी ने कहा, ”जी! सत् वचन।” इसके बाद काफिला गांव दीवाना की तरफ चल पड़ा। रास्ते में शहनशाह जी उस आदमी की बातें करते हुए कहने लगे कि ”इस बेचारे का उद्धार होना था। ”
”परमपिता परमात्मा को बना लो सच्चा दोस्त” | MSG BHANDARA Month
सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम (Ram Rahim) सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि परमपिता परमात्मा, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब हर जगह मौजूद है। जहां तक निगाह जाती है और जहां तक निगाह नहीं जाती, वहां भी वो प्रभु-परमात्मा मौजूद है। इसलिए उसे हासिल करने के लिए अपनी भावना व विचारों का शुद्धिकरण करो। सच्ची श्रद्धा बनाकर रखो। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान की फितरत है कि वह जानना चाहता है कि भगवान का रंग कैसा है? उसका रूप कैसा है?
भगवान का कोई रंग या रूप नहीं होता
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वैसे तो भगवान का कोई रंग या रूप नहीं होता है, उसको आप जहां भी जिस भी रूप में देखते हैं, वहां वह नजर आता है। उदाहरण देते हुए पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि किसी ने पूछा, तेरा गुरु कैसा है? क्या वो दूध जैसा है या फिर चंद्रमा जैसा, सूर्य जैसा, शहद या चीनी जैसा? उसने बताया कि मेरा गुरु तो गुरु जैसा है, उस जैसा कोई नहीं है। उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। वो उन सबसे अरबों-खरबों गुणा बढ़कर है। उसकी जिंदा तस्वीर हर जगह होती है।
ऐसे परमपिता परमात्मा को अपना सच्चा यार, दोस्त बनाना चाहिए, क्योंकि दुनिया की यारी, मित्रता सिर्फ मतलबी व गर्जी है। जब तक मतलब है, तब तक बात और जब मतलब निकल गया तो मुंह फेर लेते हैं। पूज्य गुरु जी ने मालिक, अल्लाह, राम, भगवान, खुदा, गॉड, रब्ब को पाने का तरीका बताते हुए फरमाया कि भगवान ही एक ऐसा है, जो आपकी हर गर्ज को पूरी कर सकता है और वो भी बिना किसी स्वार्थ के। इसलिए भगवान को हासिल करने के लिए अपनी भावना को शुद्ध रखो। विचारों का शुद्धिकरण करो।
सच्ची श्रद्धा बनाकर रखो। दूसरे के दु:ख-दर्द को दूर करो, ऐसा करने से इतनी खुशियां मिलेंगी कि आपकी झोलियां छोटी पड़ जाएंगी। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि खुद को पाक-पवित्र बनाने का एकमात्र उपाय है रूहानियत से जुड़ो। सेवा-सुमिरन और परहित के कार्य करो। दिखावा ना करो, दीनता-नम्रता धारण करो, इससे आप मालिक के करीब होते चले जाएंगे। MSG BHANDARA Month















