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    किसान आंदोलन को बल देने के लिए महिलाओं ने नये रूप से चलाया अभियान

    women launched a new campaign sachkahoon

    सच कहूँ, देवीलाल बारना, कुरुक्षेत्र। किसान आंदोलन को शुरू हुए एक वर्ष बीत चुका है। बीते वर्ष 15 अगस्त को काला दिवस के रूप में किसानों ने मनाने का फैसला लिया था। 15 अगस्त 2020 को किसानों ने कुरुक्षेत्र में तिरंगा यात्रा निकालकर लघु सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। हालांकि भाजपा द्वारा 15 अगस्त से पहले प्रेस वार्ता कर काला दिवस मनाने वाले किसानों को देशद्रोही करार दिया था, लेकिन असर उल्टा हुआ और इन वार्ताओं के कारण किसान एकजुट हो गए थे। रोचक बात यह है कि इस बार महिलाएं विशेष रूप से अपनी भागीदारी दर्ज करवा रही हैं। अबकि बार महिलाओं ने कुरुक्षेत्र में किसान आंदोलन को बल देने के नये रूप से कार्य करना शुरू किया है। 15 अगस्त को कुरुक्षेत्र से गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा जाएगी। तिरंगा यात्रा के लिए कुरुक्षेत्र के विभिन्न गावों में महिलाएं खूब प्रचार कर रही हैं।

    गीत गाकर न्योता देने जा रही घरों में

    गांव किरमच में देखा जा रहा है कि तैयारियों को लेकर महिलाएं जिस प्रकार से ब्याह शादी में गीत गाए जाते हैं उसी प्रकार से गीत गाती हुई घरों में जा रही हैं व महिलाओं को तिरंगा यात्रा में दिल्ली जाने का न्यौता दे रही हैं। कुरुक्षेत्र के गांव किरमच कि ये महिलाएं अपना घर का काम खत्म कर महिलाओं को जागरूक करने के लिए निकल पड़ती है। महिलाओं का कहना है कि महिलाओं की हिस्सेदारी आंदोलन में बराबर की रही है और जब तक आंदोलन चलेगा तब तक महिलाएं भी पुरुषों के बराबर खड़ी रहेंगी। यह लड़ाई हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ी जा रही है और जब बात उनके बच्चों की हो तो महिलाएं झांसी की रानी की तरह भी लड़ सकती है।

    महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपने खाने-पीने व पहनने के कपड़े को बांधकर रख लिया है जैसे ही काफिला दिल्ली जाएगा हम उसमें शामिल होंगी। महिलाओं की तादाद काफिले में पुरुषों से कम नहीं होगी। महिलाओं ने ड्यूटी लगाई है कि हर पांच घर से एक महिला गांव में रुकेगी जो आंदोलन में जाने वाली महिलाओं के घर का कामकाज देखेगी। सभी महिलाएं तिरंगा लेकर दिल्ली के लिए रवाना होंगी। बकायदा दिल्ली जाने वाली महिलाओं के नाम भी लिखे जा रहे हैं।

    5 घरों में कामकाज के लिए रहेगी एक महिला: संतोष

    महिला संतोष का कहना है कि वह घर घर जाकर सभी महिलाओं को कृषि कानूनों के बारे में जागरूक करेंगे और दिल्ली जाने के लिए तैयार करेंगे। 5 घरों के कामकाज के लिए एक महिला गांव में रुकेगी जो आंदोलन में जाने वाली सभी महिलाओं के घर का कामकाज देखेगी। साथ ही संतोष ने कहा कि किसी भी बीजेपी या जेजेपी के नेता को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा। महिला बिमला का कहना है कि वह आंदोलन में जाने वाली महिलाओं के घर का कामकाज देखेंगे और जब तक उन्हें हक नहीं मिल जाता तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे। राजबाला का कहना है कि यह लड़ाई उनकी जमीन की है और वह अपने बच्चों के हक के लिए झांसी की रानी बनने को भी तैयार हैं। राजबाला ने कहा कि यह आंदोलन चाहे 10 साल तक चले तब तक महिलाएं इस आंदोलन में पुरुषों के बराबर चलेंगी।

    दिल्ली बोर्डर जाने के लिए किए बैग तैयार: रामवती

    महिला किसान रामवती का कहना है कि इस लड़ाई में वह पीछे नहीं हटेंगे चाहे उनकी जान क्यों ना चली जाए। सभी महिलाओं ने अपने बैग तैयार कर लिए हैं और अपने खाने का राशन भी साथ रख लिया है अब यह आंदोलन कितना भी लंबा चले हमें इसकी परवाह नहीं हम अपने हक लेकर ही वापस लौटेंगे। उनसे जब पूछा गया कि क्या किसानों को चुनाव लड़का चाहिए तो रामवती का कहना था कि अगर सरकार किसानों की बात नहीं सुनेगी तो उनको किसानों को ही चुनाव लड़ आना पड़ेगा और संसद तक भेजना पड़ेगा ताकि उनकी बात सुनी जा सके। किरमच के नंबरदार संजू का कहना है कि उनके गांव की महिलाओं की पहले भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही है और अब भी वह कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलनकारी किसानों के साथ खड़ी है संजू ने कहा कि अगर सरकार किसानों की बात नहीं सुनती तो चुनाव लड़ना उनकी मजबूरी बन जाएगा और वह अपने किसान भाइयों को ही चुनाव में खड़ा करेंगे।

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