सच्चे सतगुरू जी ने दया-मेहर रहमत से अपने शिष्य को भयानक रोगों से छुटकारा दिलाया

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श्री हरभजन लाल पुत्र श्री सोहन राम गांव बरूवाली-1 जिला सरसा, पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमतों का वर्णन इस प्रकार करता है:-

सन् 1992 की बात है, मैंने तथा मेरी पत्नी ने डेरा सच्चा सौदा पहुंचकर पूजनीय हजूर पिता जी का सत्संग सुना तथा नामदान लिया। पूज्य सतगुरू जी ने मुझ पर यह रहमत बरसाई कि मुझे साध-संगत को पानी पिलाने की सेवा बख्श दी, जिसकी बदौलत मैं प्रत्येक मासिक सत्संग पर जाने लगा। सन् 2000 का जिक्र है कि मेरी पत्नी बांगा बाई के गुर्दे में दर्द रहने लगा। डॉक्टरों ने चैकअप कर कहा कि इसके गुर्दे में पत्थरियां हैं, जो कि बिना आॅपरेशन के नहीं निकल सकतीं। इसलिए आॅपरेशन तो करवाना ही पड़ेगा क्योंकि इसका ओर कोई ईलाज नहीं है।

मेरी पत्नी ये सब सुनकर घबरा गई। एक तो उसकी आयु करीब 72 वर्ष थी, दूसरा उसको दिल की भी बीमारी थी और तीसरा वह आॅपरेशन करवाने से बहुत ही डरती थी। उसने डॉक्टरों को कहा कि हम घर पर विचार करेंगे, और सोचेंगे। डॉक्टर ने उस दर्द की दवाई दी तथा कहा कि जल्दी से जल्दी कोई आॅपरेशन करवा लेना। घर आकर उसे पहले से अधिक दर्द होने लगा। वह फिर से अस्पताल में दवाई लेने गई तो डॉक्टरों ने उसे आॅपरेशन के लिए तारीख दे दी और दर्द निवारक दवाई भी दी। परंतु वह पत्थरी के दर्द से बहुत ही परेशान थी।

वह अपने मन में अपने सतगुरू परम पूजनीय हजूर पिता जी के पावन चरणों में अर्ज करने लगी कि हे दयालु सतगुरू! मुझे आॅपरेशन से बचा लो, नहीं तो मेरी मौत हो जाएगी। रात के 9-10 बजे का समय था, हम दोनों पति-पत्नी अगले दिन आॅपरेशन करवाने के लिए विचार-विमर्श कर रहे थे। इतने में हमारे गांव के भंगीदास धर्मचंद ने आकर मुझे आवाज दी। मैं धर्मचंद को अंदर ले आया। उसने हमें कहा कि सरसा दरबार से हुक्म आया है कि हमने सुबह शाह सतनाम जी अनहदपुर धाम श्री कोलायत जिला बीकानेर (राज.) जाना है।

वहां पर पूजनीय हजूर पिता जी का सत्संग है। उन दिनों डेरा सच्चा सौदा की तरफ से उस इलाके में सूखा पीड़ितों के लिए तूड़ी तथा पीने का पानी पहुंचाया जा रहा था। उसने कहा कि अपनी पानी की समिति में पक्की ड्यूटी है, इसलिए हमने वहां जरूर जाना है, अपनी सेवा से गैजहाजिर बिल्कुल नहीं होना। मैंने धर्मचंद को कहा कि मेरी पत्नी बहुत तकलीफ में है। सुबह उसके गुर्दे का आॅपरेशन होना है, इसलिए मैं नहीं जा सकता। उसके कुछ कहने से पहले ही पत्नी बोल पड़ी की तू सेवा पर जा। मालिक जो करेगा सो ठीक करेगा। धर्मचंद ने कहा कि बात तो ठीक है! जो जीव सतगुरू का काम करते हैं सतगुरू उनका काम पहले करता है। दोनों के हां कहने पर मैंने भी हां कर दी कि मैं कल सेवा पर श्री कोलायत जाऊंगा। उसी रात पूजनीय हजूर पिता जी ने मेरी पत्नी को दर्शन दिए।

Guru-ji

उस समय शहनशाह जी ने सफेद वस्त्र पहने हुए थे। पूजनीय हजूर पिता ने मेरी पत्नी को आशीर्वाद देते हुए वचन फरमाया,‘‘बेटा! तू ठीक है।’’ मेरी पत्नी पूजनीय हजूर पिता के दर्शन कर अत्यंत खुश हुई और उसका दर्द भी रूक गया। अगले दिन मैं धर्मचंद को साथ लेकर श्री कोलायत चला गया। वहां पर हमें तीन-चार दिन लग गए। जब हम घर लौटे तो मेरी पत्नी बहुत ही खुश थी, हमारा सारा परिवार खुश तथा बिल्कुल स्वस्थ था। उसके बाद से आज उसे कभी भी कोई तकलीफ नहीं हुई। पत्थरियां किधर गई उनको भी कुछ पता नहीं चला। सच्चे सतगुरू जी ने मेरी पत्नी की अर्ज मंजूर कर उसके रोग ही खत्म कर दिए।

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