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    पीपल व बरगद के पेड़ों पर चला कुल्हाड़ा

    दर्जनों पंछियों का आशियाना ध्वस्त

    खिजराबाद। (सच कहूँ/राजेन्द्र कुमार) जगाधरी-पौंटा साहिब नेशनल हाईवे पर अराईयां वाला गांव के नजदीक दिनदिहाड़े पीर की मजार पर स्थित वर्षों पुराने बरगद के पेड़ सहित पीपल के दो पेड़ काट लिए गए। वन विभाग के कर्मचारी लकड़ी काटने वालों को पकड़ना तो दूर उल्टा जुर्माने की रसीद काटने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आए। मामला जिला वन अधिकारी संज्ञान में आने के बाद कर्मचारियों ने देर रात मौके पर पहुंचकर एक ट्राली को कब्जे में लिया, तब तक दो अन्य ट्रालियां भरकर जा चुकी थी। वन विभाग के ढुलमुल कार्रवाई के चलते पीपल और बड़ का अवैध कटान करने वालों को वहां से लकड़ी उठाने का मौका मिल गया। अब देखने वाली बात यह है की वन विभाग बड़ व पीपल की लकड़ी को बेचने वाले, खरीदने वाले और लकड़ी कटान में शामिल ट्रैक्टर ट्राली और क्रेन पर क्या कार्रवाई करता है।

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    राष्ट्रीय धरोहर है पीपल के वृक्ष

    आपको बता दें पीपल के वृक्ष को लोगों की आस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा प्राप्त है। संविधान के अनुसार पीपल को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा प्राप्त है परंतु यदि किसी कारणवश पेड़ काटना अत्यंत ही जरूरी हो तो निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके ही ऐसा किया जा सकता है। पेड़ काटने वालों में कानून व वन विभाग का कोई खौफ नहीं है। वह सरेआम दिनदिहाड़े बैखोफ पेड़ काटने में व्यस्त रहे। ऐसे में सड़क किनारे से बुजुर्ग बरगद के पेड़ों का काटा जाना विभाग की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान उठाता है।

    वन विभाग के जिला अधिकारी राजेश कुमार का कहना है वह मामले की गंभीरता से जांच कराएंगे। विभाग द्वारा लकड़ी से लदी एक ट्राली को कब्जे में ले लिया गया है। जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    पेड़ काटने पर ग्रामीणों में गहरा रोष

    जगाधरी पौंटा साहिब नेशनल हाईवे पर काटे गए बड़ व पीपल के पेड़ को लेकर स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि बड़ व पीपल पर्यावरण के साथ-साथ हमारी आस्था का भी केंद्र रहे हैं, वही पेड़ों की टहनियों पर दर्जनों पक्षियों ने भी अपना आशियाना बना हुआ था। पेड़ पर बने घोंसले पेड़ काटने की वजह से तहस-नहस हो गए। पंछियों के घोसले में पल रहे बच्चे व पंछियों के अंडे भी इस कटान की भेंट चढ़ गए। पेड़ काटने से पेड़ पर घोंसला बनाकर रह रहे पक्षी भी बेघर हो गए। ऐसे में जिसने भी है पेड़ काटे हैं, उन्होंने अच्छा नहीं किया है।

    वन मंत्री कर चुके हैं 60 वर्ष से अधिक आयु वाले वृक्षों को वृद्धावस्था पेंशन देने की घोषणा

    हाल ही में हरियाणा सरकार ने 60 साल से ऊपर की आयु वाले वृक्षों की वृद्धावस्था पेंशन देने की घोषणा की है क्योंकि यह वृक्ष हमारे बुजुर्गों के समान है। वृक्षों के देखरेख करने वालों को हरियाणा सरकार की ओर से लगभग ढाई हजार रुपए मासिक पेंशन दिए जाने का प्रावधान है।

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