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    Spinach Farming Technique: पालक की खेती का यह तरीका अनोखा! 20 दिनों में ही देगा लाखों का मुनाफा!

    Spinach Cultivation
    Spinach Farming Technique: पालक की खेती का यह तरीका अनोखा! 20 दिनों में ही देगा लाखों का मुनाफा!

    Spinach Farming Technique: हरी पत्तेदार सब्जियाँ, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही गुणकारी और फायदेमंद होती हैं और भारत में बड़े स्तर पर किसान इसकी खेती करते हैं। इन हरी पत्तेदार सब्जियों के लिए सितंबर से लेकर नवंबर तक का मौसम काफी अनुकूल रहता है, खासकर पालक, मेथी, धनिया आदि जैसी सब्जियों की खेती के लिए। इस समय की सबसे लोकप्रिय सब्जी के बारे में बात करें तो पालक की खेती काफी अच्छा मुनाफा किसानों को दे सकती है। क्योंकि पालक की सब्जी इन दिनों ज्यादा खाई जाने वाली सब्जी है। Spinach Cultivation

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    विटामिन-ए, विटामिन-सी, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस जैसे कई आवश्यक खनिज तत्वों से भरपूर होती है पालक। पालक से सब्जी, सलाद, भाजी, पराठे, पकौड़े और जूस भी बनाया जा सकता है। इसलिए किसानों के लिए पालक इन दिनों बेहतर मुनाफे का सौदा बन सकती है। किसान अगर इन दिनों पालक की खेती करते हैं तो वो 150 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टयेर तक का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जिसे बाजार में 15 से 20 रुपये प्रति गुत्थी के हिसाब से बेच सकते हैं और बेहतरीन मुनाफा कमा सकते हैं।

    अभी सर्वोत्तम है जलवायु | Spinach Cultivation

    हरी पत्तेदार सब्जी पालक को उगाने का इन दिनों सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि यह बहुत ही कम समय में पककर तैयार हो जाती है। सर्दी का मौसम ही पालक की खेती के लिए सर्वोत्तम माना गया है। क्योंकि इन दिनों में पालक की अच्छी उपज मिलती है। अगर किसान बेहतर उत्पादन पाना चाहते हैं तो पालक की आॅलग्रीन, पूसा पालक, पूसा हरित और पूसा ज्योति किस्मों की बुवाई करके बेहतरीन मुनाफा कमा सकते हैं।

    Spinach Cultivation

    कैसी मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है?

    पालक वैसे तो देश भर की विभिन्न मिट्टियों में उगाई जा सकती है। कई लोग तो अपने घरों की छतों पर या बालकनी में भी क्यारियां या कंटेनर बनाकर उगाते हैं। वैसे पालक की खेती के लिए नमकीन या लवणीय भूमि सबसे सर्वोत्तम मानी गई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस मिट्टी में कोई भी फसल नहीं होती वहां पालक की सबसे अच्छी पैदावार ली जा सकती है। और तो और दोमट मिट्टी में भी पालक की खेती करके बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है, वह भी कम मेहनत में।

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    बीज की मात्रा

    अगर किसान पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जी का अच्छा उत्पादन लेना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि अच्छी मात्रा में जैविक खाद या वर्मी कंपोस्ट उपयोग में लाई जाए। नाइट्रोजन उपयोग करके भी वैसे तो पालक की फसल में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन जैविक खेती करने वाले किसान नाइट्रोजन की जगह जीवामृत का उपयोग भी कर सकते हैं। बीजों की बात करें तो एक हेक्टेयर खेत में पालक की खेती के लिए 30 से 32 किग्रा बीजों की आवश्यकता होती है, जिनसे 150 से 200 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है।

    खेती करने की विधि

    पालक एक ऐसी हरी पत्तेदार सब्जी है, जिसमें बहुत ही कम लागत लगाकर बहुत ही ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता हैं। क्योंकि इन दिनों बाजार में पालक की खूब मांग रहती है। घरों की रसोई में स्वादिष्ट व्यंजन ही नहीं अपितु सलाद एवं जूस आदि तक में पालक इस्तेमाल में लाई जाती है। पालक के पकौड़े तो स्वाद में बहुत ही मशहूर हैं। इन दिनों पालक की खेती का खास मौसम है। सिर्फ एक बार की बुवाई से ही 5 से 6 कटाईयां करके बंपर उत्पादन लिया जा सकता है। और तो और एक बार कटाई करने के बाद 15 दिनों के भीतर ही पालक का उत्पादन दोबारा मिल जाता है। ज्यादा टम्प्रेचर वाले मौसम को छोड़कर अगले 10 महीनों तक पालक का अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।

    सिंचाई | Green Vegetable Farming

    हाँ, अगर पालक की खेती से कम लागत में ज्यादा मुनाफ ा लेना है तो इसमें पानी की अच्छी मात्रा का जरूर ध्यान रखना होता है। वैसे इसकी सिंचाई में अधिक पानी खर्च करने की भी जरूरत नहीं होती। हल्की नमी बनाकर भी पालक के खेती से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। विशेषज्ञों की राय में सर्दियों में 10 से 15 दिनों के बाद ही पालक की खेती में सिंचाई करनी पड़ती है। वहीं कटाई करने से 2-3 दिन पहले भी हल्का पानी लगाकर पालक का अच्छा उत्पादन मिल सकता है।

    कीट प्रबंधन | Spinach Cultivation

    यह एक ऐसी सब्जी है, जिसका सीधा संबंध जमीन से होता है, इसीलिए इस सब्जी में कवक रोग एवं कीट जरूर लग सकते हैं, खासतौर पर खरपतवारों सहित कैटरपिलर तथा इल्लियों का प्रकोप पालक की खेती में बढ़ने का खतरा बना रहता है। इन इल्लियों का ऐसा प्रभाव होता है कि ये पालक के पत्तियों को बीच में से खाकर सारी पैदावार खराब कर सकती हैं। जिसकी रोकथाम के लिए खेत में नीम-गौमूत्र आधारित कीटनाशक का 20 दिन के अंदर छिड़काव करना चाहिए।

    कटाई और पैदावार | Spinach Cultivation

    अगर किसान पालक की खेती की उन्नत किस्म चयनित करते हैं तो पालक की फसल एक ऐसी फसल है जो जल्दी पक जाती है। बता दें कि जहां साधारण किस्म को पकने में 30 दिन लगते हैं, वहीं उन्नत किस्में 20 से 25 दिनों में ही 15 से 30 सेंटीमीटर तक बढ़ जाती हैं। कटाई के तरीके के बारे में बात करें तो कटाई के समय पालक के पौधों की जड़ों से 5 से 6 सेंटीमीटर ऊपर से पालक की पत्तियों की कटाई करनी चाहिये, जिससे हर 15 दिन के अंतराल पर 5 से 6 कटाईयां करके अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। Spinach Cultivation

    अस्वीकरण: लेख में दी गई जानकारी आपकी सामान्य जानकारी के लिए प्रदान की गई है, सच कहूँ इसकी पुष्टि नहीं करता है। ज्यादा जानकारी के लिए आप किसी कृषि विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं या किसी एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं।

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