पूज्य गुरु जी के ये वचन पढ़ना ना भूले, किस्मत चमक जाएगी

Anmol vachan DSS

बरनावा। (सच कहूँ न्यूज) सच्चे दाता रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने बुधवार सायं शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (उत्तर प्रदेश) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से साध-संगत और सेवादारों को खुशियों से मालोमाल किया। पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन अवतार माह के इस शुभ अवसर पर पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ‘‘मालिक का नाम सुखों की खान और सेवादार होते हैं महान।’’

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सेवा किसे कहा जाता है? किसी दूसरे से अपनी सेवा न करवाना ये भी एक सेवा है। बहुत लोग होते हैं जो पानी का गिलास भी ख़ुद उठाकर नहीं पीते। बहुत से लोग होते हैं जो किसी भी चीज को उठाना पसंद नहीं करते, तो ये कोई सेवा का तरीका नहीं होता। सेवा की पहले अपनी तरफ से शुरुआत कीजिये। मालिक ने हाथ पैर चला रखे हैं तो किसी के मोहताज मत बनिए। अपने पानी का गिलास, अपनी चाय का कप जहां तक संभव हो ख़ुद उठाकर पीएं। हम भी अपना कार्य खुद ही करते हैं। तो आपको भी यही करना चाहिए। फिर होता है सेवा परिवार से, अगर आप छोटे हैं तो बड़ों का सत्कार करो और बड़े हैं तो छोटों को बेग़र्ज, नि:स्वार्थ भावना से अच्छाई के लिए आशीर्वाद दो, उनके सिर पर हाथ रखो, ये भी एक सेवा है।

घर में माँ-बुजुर्ग हैं, चल-फिर नहीं पा रहे, सही ढंग से कुछ उठा नहीं पा रहे, उनको खिलाना-पिलाना भी एक सेवा है। उसके बाद आप अपने समाज में देखें, अपने आस-पास प्रभु की बनाई सृष्टि, किसी कर्मों की वजह से दु:ख पा रही है, वो पशु, पक्षी, परिंदे, इन्सान कोई भी हो सकते हैं, तो उनका दु:ख दूर करने के लिए आप कदम उठाएं। बीमार का इलाज करवा दीजिये, भूखे को खाना खिला दीजिये, प्यासे को पानी पिला दीजिये, ये महान सेवा है।

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पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि साध-संगत मिलकर भी सेवा करती है, ये एक और बड़ा यज्ञ हो गया, महान यज्ञ। जब आप सभी मिलकर किसी निराश्रय का आसरा (मकान) बना देते हैं। बहुत साध-संगत घर बनाकर देती है। ये और बड़ी सेवा है। साध-संगत मिलकर किसी मजबूर इन्सान, आर्थिक तौर पर कमजोर इन्सान की बेटी की शादी करवाते हैं, ये भी एक महान सेवा है। सेवादार मिलकर आर्थिक तौर पर कमजोर बच्चों को पढ़ाते हैं, उनकी मदद करते हैं, ये भी एक बहुत बड़ी सेवा है। आप पशुओं को चारा डालते हैं, पक्षियों को दाना-पानी देते हैं ये भी बड़ी सेवा है। आप खूनदान करते हैं, मरणोपरांत आँखेंदान, शरीरदान, जिस पर रिसर्च होता है, तो ये भी महादानों के दान में आ जाते हैं।

और कई बच्चों ने जीते जी गुर्दा दान के फार्म भरे हुए हैं और लिगली तौर पर वो एक-दो जगहों पर गुर्दा दान कर भी चुके हैं, तो ये भी महान से भी महान सेवा है। तो सेवा का कोई किनारा नहीं, कि कहां तक लास्ट है, कहां तक ऊँचाई है। जितनी सेवा करते जाओगे, उससे आपको आत्मिक शांति मिलेगी, आत्मबल मिलेगा, चयन-आनंद आएगा और इसके साथ-साथ ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की भक्ति में आपका मन लगने लग जाएगा, आपकी आत्मा ठहरने लग जाएगी। तो ये बहुत जरूरी है कि आप सेवा करें।

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पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आज के वक्त स्वार्थ का बोलबाला है। कई नगरों में तो राम-राम कहने पर भी पूछते हैं कि क्या चाहिए? यानि ग़र्ज के बिना राम-राम भी मंजूर नहीं करते। जबकि राम-राम बोलने से मुँह पवित्र होता है, आत्मा पवित्र होती है। तो इसलिए ऐसे भयानक घोर कलियुग में, स्वार्थी युग में जो लोग परहित परमार्थ तन, मन, धन से करते हैं धन्य हैं उनके माँ-बाप और धन्य वो लोग होते हैं, जो ऐसी सेवा करते हैं।

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हमने जब खूनदान का कैंप शुरू करवाया, आई कैंप लगा करते थे, उस दरम्यिान देखा कि लोग भाग-भाग कर सेवा कर रहे हैं। पर उससे पहले हमने 1980 से 1990 के बीच में कई बार देखा कि अगर ब्लड की जरूरत पड़ती तो सगा भाई सगे भाई को नहीं देता था। एक बार हम किसी के साथ गए थे तो डॉक्टर साहिबान कहने लगे कि ब्लड डोनेट करना पड़ेगा। तो मरीज के भाई का ब्लड ग्रुप उससे मिलता था। लेकिन जब उनसे मांगा गया तो वो आगे चले गए, साइड में चले गए, वापिस लौटे ही नहीं। तो ऐसा टाइम भी था। और आज राम-नाम के प्यारे लाखों में हैं, जो ब्लड डोनेट को तैयार रहते हैं, बेमिसाल, कमाल।

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि नौजवान पीढ़ी को हमने देखा कि विवाह शादी के दिन ब्लड डोनेट करके आते हैं, जन्म दिन के दिन ब्लड डोनेट करते हैं, पेड़ लगाते हैं, मानवता का भला करते हैं, ये बेमिसाल बातें हैं। वो कहावत है पुरातन वनडे हीरो, शादी जब होती है तो वो हीरो ही होता है, सबका ध्यान उसी पर ही होता है। तो एक दिन का तो वो हीरो है ही है, लेकिन अगर वो हीरो जाकर ब्लड डूनेट करता है और मरणोपरांत आँखेंदान और शरीरदान का प्रण करता है तो वास्तव में वो लंबे समय के लिए हीरो बन जाता है। अपनी इन्सानियत की वजह से, अपनी मानवता की वजह से। तो ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। तो भाई ज्यों-ज्यों सेवा करते जाओगे तो आपका ध्यान, आपके विचार सुमिरन में लगने लगेंगे और ज्यों-ज्यों सुमिरन करोगे, त्यों-त्यों आत्मबल बढ़ता जाएगा, त्यों-त्यों आप अपने हर क्षेत्र में शारीरिक, मानसिक, रूहानी यानि आत्मिक पर तरक्की करेंगे और समाज के लिए कुछ ना कुछ अच्छा करते चले जाएंगे, जिससे आपका नाम हमेशा के लिए अमर हो जाएगा।

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