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Sunday, March 1, 2026
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    बीमारी का इलाज जानना था तो जड़ सहित फसल उखाड़ लाए किसान

    Farmers Meeting

    कुलपति प्रोफेसर बीआर कंबोज ने भी समझा किसानों के दर्द को

    सच कहूँ/संदीप सिंहमार।
    हिसार। हरियाणा के ग्रामीण परिवेश में अक्सर ऐसा कहा व सुना जाता है कि जिसकी उंगली कटती है उसी व्यक्ति को दर्द होता है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में किसान गोष्ठी के दौरान हुई कुछ ऐसा ही देखने को मिला। कपास/नरमा की फसल में बारिश के दिनों में बीमारी का प्रकोप आना एक आम बात है लेकिन जब हरा तेला व झुलसा रोग जैसी सामान्य बीमारियों का भी समय पर उपचार ना दिखाई दे तो किसान अपनी फसल को देखकर उतावला में बेचैन हो जाता है। क्योंकि किसान फसलों से अपने बच्चों की तरह ही प्रेम करता है। यही एक वजह है कि बच्चों के पालन पोषण की तरह ही किसान फसलों के विकास पर भी ध्यान देता है।

    उसकी रोजी रोटी का आखिर साधन फसल ही है। इस किसान गोष्ठी में जहां कृषि वैज्ञानिकों ने भी पूरी लगन से किसानों की समस्याओं को समझ कर समाधान बताया तो हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीआर कंबोज ने भी किसानों के दर्द को समझा। किसान गोष्ठी के दौरान वैज्ञानिकों ने भी किसानों को उचित सलाह देकर उनके सवालों के जवाब दिए। वैज्ञानिकों ने किसानों को वर्तमान समय में कपास की फसल में आ रही समस्या थ्रिप्स, दीमक, फल झडनÞा, समय से पहले फल उठाना, हरा तेला, जड़ ग्लन, पीलापन, अचानक फसल खराब होना आदि समस्याओं के प्रति भी जागरुक किया। गोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशालय, अनुसंधान निदेशालय, कपास अनुभाग, कृषि विज्ञान केंद्र व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। गोष्ठी का विषय ‘कपास के उत्पादन व बचाव की उन्नत तकनीक’ रखा गया था।

    किसानों की समस्या को अपनी समस्या मानकर खोजना होगा समाधान-कुलपति

    किसानों से रुबरु होते हुए कुलपति प्रोफेसर बीआर काम्बोज ने कहा कि किसानों की समस्याओं का निदान करना प्रत्येक कृषि वैज्ञानिक का दायित्व है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों को सदैव तत्पर रहना होगा। समाज के सभी वर्गों को किसान की समस्या को अपनी समस्या मानकर उसका समाधान खोजना होगा। काम्बोज ने कहा कि इस बार लगातार विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम फील्ड में जाकर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जुटी हुई है ताकि किसानों को गत वर्षों की भांति कम से कम समस्याओं का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि कपास की फसल में बेहतर उत्पादन के लिए कीट व रोगों का एकीकृत प्रबंधन जरुरी है। इसके लिए समय-समय पर वैज्ञानिकों द्वारा फसलों संबंधी जारी हिदायतों व सलाह का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

    हरियाणा प्रदेश की एक महत्वपूर्ण नगदी फसल है कपास

    विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास ढांडा ने कृषि वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे किसानों के साथ मिलकर समय-समय पर उनकी समस्या के निदान के लिए जुटे रहें। अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत ने कहा कि कपास हरियाणा प्रदेश की एक महत्वपूर्ण नगदी फसल है। इसलिए किसानों को इस फसल में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा समय-समय पर दी जाने वाली सलाह व कीटनाशकों को लेकर की गई सिफारिशों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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