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    अबोहर : गांव शेरगढ़ बुनियादी सुविधाओं से 72 सालों से वंचित

    Negligence

    सन् 2001 में बने दो-तीन कमरों के सेहत केंद्र की हालत भी बनी नाजुक | Negligence

    अबोहर(सुधीर अरोड़ा)। ग्रामीण क्षेत्रों की हालत और दिशा सुधारने के लिए केंद्र और प्रदेश की सरकार (Negligence) चाहे बड़े -बड़े दावे करती हो परंतु फिर भी विधान सभा हलका बल्लुआना के अनेकों गांवों को बुनियादी सुविधाएं पाने के लिए आजादी के बाद के 72 सालों बाद भी वंचित होना पड़ रहा है। ऐसा ही कुछ दृश्य पंजाब व राजस्थान सीमा के साथ लगते आखिरी गांव शेरगढ़ के हालत हैं। गांववासियों के साफ पीने का पानी, सड़क रास्ते, गंदे पानी की निकासी, चिकित्सा जैसी प्राथमिक सुविधाओं की कमी है। गांव के वाटर वर्कस की हालत जर्जर हो चुकी है जहां डिग्गियों में गन्दगी मच्छर विकसित रहे, जिसके साथ गांव में बीमारियां फैलने का डर भी है।

    उस के साथ ही सन् 2001 में बने दो-तीन कमरों के सेहत केंद्र की हालत भी नाजुक हुई पड़ी है और चारदीवारी नहीं होने साथ आवारा पशुओं की भरमार है। गांव की गलियां कच्ची होने और गंदे पानी की निकासी नहीं होने साथ गलियों में कीचड़ गन्दगी पसरी रहती है, वहीं गांव के छप्पड़ की हालत दयनीय बनी हुई है। पशुओं के लिए भी पीने के लायक पानी नहीं है। गांव के बाहर सड़क किनारे बनी हड्डारोड़ी भी राहगीरों के लिए परेशानी का संयोग बना हुई है। हड्डारोड़ी सड़क किनारे होने के कारण कुत्तों ने कुछ महीने पहले ही एक 12 साल के बच्चे को नोच -नोच कर मार दिया था परंतु उस अजय तक उस जगह से हटाया नहीं गया, वहीं गांव की गलियों में बिजली की लटक रही नंगीं तारें मौत को दावत दे रही हैं।

    सरपंच ने किसी भी सवाल का जवाब देने से झाड़ा पल्ला | Negligence

    गांव में मौजूद समस्याएं व विकास कामों के लिए जब हमारे प्रतिनिधि द्वारा गांव के सरपंच टिकते राम के साथ बातचीत करने पर सवाल जवाब के लिए संपर्क करना चाहा तो उन किसी भी सवाल का जवाब देने पर समय न होने का कह कर पल्ला झाड़ दिया, जिससे वह सवालों से बचते नजर आए। हालांकि गांव में एक जगह अभी गंदे पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण करवाया जा रहा है। जब इस संबंधी गांव वासियों के साथ बात की तो उन्होंने कहा कि बेहद निंदनीय है यदि गांव का सरपंच मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि इस तरह लग रहा है जैसे गांव के विकास के लिए वह बिल्कुल चिंतित नहीं। गांव वासियों ने संबंधित प्रशासन की ओर से गांव के विकास की तरफ ध्यान देने की अपील की है।

    युवाओं ने शमशानघाट को गोल्डन पार्क में बदला | Negligence

    एक तरफ गांव के विकास के लिए जहां ग्राम पंचायत सरपंच साहब बिल्कुल भी चिंतित नहीं दिखाई दे रहे, वहीं गांव के श्मशान भूमि की नुहार गांव के नौजवानों ने इस तरह बदल रखी है जैसे यह श्मशान भूमि नहीं एक गोल्डन सिटी का पार्क हो, लोग सुबह-सुबह यहां सैर -सपाटे के लिए आते हैं, इस के अलावा गौशाला का निर्माण कर सैंकड़ों गायों की संभाल भी की जा रही है।

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