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    जमीन अधिग्रहण मामला: पाडला के ग्रामीणों ने दुसरे दिन सचिवालय पहुँच किया प्रदर्शन , डीसी को सोंपा ज्ञापन

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    Kaithal News : जमीन अधिग्रहण मामला: पाडला के ग्रामीणों ने दुसरे दिन सचिवालय पहुँच किया प्रदर्शन , डीसी को सोंपा ज्ञापन

    डीसी से मिलने के बाद आश्वस्त नजर आये ग्रामीण | Kaithal News

    कैथल (सच कहूं/कुलदीप नैन)। Protests: गांव पाडला में केंद्रीय पॉवर ग्रिड की ओर से जमीन अधिग्रहण मामले को लेकर ग्रामीणों ने मंगलवार को दूसरे दिन भी प्रदर्शन किया। इस दौरान दोपहर के समय काफी संख्या में ग्रामीण सचिवालय में पहुंच और यहां पर डीसी प्रशांत पंवार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर किसान नेता महावीर नरड भी ग्रामीणों सहित किसानों के साथ लघु सचिवालय में पहुंचे और किसानों के रोष प्रदर्शन में हिस्सा लिया। डीसी प्रशांत पंवार से मिलने के बाद किसान आश्वस्त दिखाई दिए। कहा कि वे डीसी को ज्ञापन देने आए थे, ग्रामीणों ने बताया कि डीसी ने ज्ञापन लेते हुए कहा है कि पाडला गांव के किसान अगर जमीन नहीं देना चाहते है तो उनकी इस बात से उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया जाएगा। Kaithal News

    इससे पहले सुबह 10 बजे ही किसान लघु सचिवालय पहुंच गए थे और पाडला गांव में केंद्रीय पॉवर ग्रिड द्वारा जमीन अधिकृत करने को लेकर रोष जताया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि सरकार ने जमीन जबरन अधिकृत करने की सोची और मांग को नहीं माना तो पूरा गांव खेतों में आकर बैठ जाएगा, लेकिन किसी भी कीमत पर जमीन अधिग्रहण नहीं होने देंगे। किसान नेता महावीर नरड़ ने कहा कि अगर पाडला गांव में जमीन अधिग्रहण को लेकर सरकार ग्रामीणों की मांग नहीं मानती तो वे एक कमेटी बनाएंगे। कमेटी किसानों के साथ मिलकर काम करेगी। ग्रामीण रोशन लाल पाडला ने बताया कि वह सोमवार पावर ग्रिड के डीजीएम से मिले थे। उन्हें भी ज्ञापन दिया गया था। डीजीएम ने भी आश्वासन दिया था कि उनका ज्ञान आला अधिकारियों के पास पहुंचा दिया जाएगा।

    यह है पूरा मामला | Kaithal News

    ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव से पहले सोलर प्लांट लगाने वाली एक कंपनी ने पाडला गांव में सर्वे किया था जिन्होंने शुरूआत में 240 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने की बात कही थी। अब 300 एकड़ में प्लांट लगाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि इसको लेकर कोई सहमति किसानों की नहीं ली गयी | जिस पट्टी में ये प्लांट लगाया जाना उसमें कुल 400 एकड़ ही जमीन है। यदि 300 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर ली तो ग्रामीण बर्बाद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे। यदि जमीन नहीं रहेगी तो छोटे जमींदार कैसे अपना गुजारा कर पाएंगे।

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