मुंबई। भारत में सोना केवल आभूषणों तक सीमित धातु नहीं है, बल्कि इसे सुरक्षित निवेश और संपत्ति के भरोसेमंद साधन के रूप में भी देखा जाता है। सोना खरीदते समय अक्सर “कैरेट” शब्द का उल्लेख किया जाता है, किंतु अनेक उपभोक्ता और निवेशक इसके वास्तविक अर्थ और महत्व से अनभिज्ञ रहते हैं। सोने की गुणवत्ता, शुद्धता और मूल्य को समझने के लिए कैरेट की सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। Gold News
वास्तव में, कैरेट सोने की शुद्धता को मापने की एक इकाई है। यह दर्शाता है कि किसी गहने या सिक्के में कुल धातु के अनुपात में शुद्ध सोने की मात्रा कितनी है। कैरेट की अधिकतम सीमा 24 मानी जाती है। 24 कैरेट सोना लगभग पूर्णतः शुद्ध होता है, जिसमें अन्य धातुओं की मात्रा नगण्य होती है।
व्यवहार में प्रायः चार प्रकार के कैरेट वाले सोने का उपयोग अधिक होता है। 24 कैरेट सोना सर्वाधिक शुद्ध होता है, जिसमें लगभग 99.9 प्रतिशत सोना शामिल रहता है। इसकी कोमलता अधिक होने के कारण इसका उपयोग मुख्यतः सिक्के और सोने की ईंट (बिस्किट) बनाने में किया जाता है। Gold News
वहीं 22 कैरेट सोना आभूषण निर्माण में सबसे अधिक प्रचलित है, जिसमें लगभग 91.6 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है और शेष भाग में अन्य धातुएँ मिलाई जाती हैं, ताकि गहनों को मजबूती मिल सके। 18 कैरेट सोने में लगभग 75 प्रतिशत शुद्ध सोना पाया जाता है और इसका उपयोग आकर्षक व डिजाइनर आभूषणों में किया जाता है। इसके अलावा 14 कैरेट सोने में करीब 58.5 प्रतिशत सोना होता है, जो हल्के और अपेक्षाकृत कम कीमत वाले गहनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
कैरेट का सीधा संबंध सोने की कीमत से होता है। जितना अधिक कैरेट, उतनी ही अधिक शुद्धता और उसी अनुपात में कीमत भी अधिक होती है। इसी कारण निवेश के उद्देश्य से लोग सामान्यतः 24 कैरेट सोना खरीदना पसंद करते हैं, जबकि आभूषणों के लिए 22 कैरेट या उससे कम शुद्धता वाला सोना अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि 24 कैरेट सोना अत्यंत नरम होता है। Gold News
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीदार को कैरेट की जानकारी न हो, तो उसे कम शुद्धता वाला सोना अधिक कीमत पर बेचे जाने का खतरा रहता है। निवेश के दृष्टिकोण से भी शुद्धता का विशेष महत्व है, क्योंकि भविष्य में मूल्य निर्धारण में यही सबसे बड़ा आधार बनती है। गलत कैरेट का चयन आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
सोने की शुद्धता की जांच के लिए हॉलमार्क को सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है। भारत में भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा हॉलमार्किंग की जाती है, जिसमें सोने पर कैरेट, शुद्धता प्रतिशत और अन्य पहचान चिह्न अंकित होते हैं। इसके अतिरिक्त, आभूषण की दुकानों पर उपलब्ध कैरेट मीटर से भी शुद्धता की जांच की जा सकती है, और आवश्यकता होने पर प्रयोगशाला परीक्षण का सहारा भी लिया जा सकता है।
जानकारों का कहना है कि सोना खरीदते या उसमें निवेश करते समय केवल उसकी कीमत या बनावट पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। उसकी शुद्धता, कैरेट की सही समझ और हॉलमार्क की पहचान से ही उपभोक्ता और निवेशक सुरक्षित एवं लाभकारी सौदा कर सकते हैं। Gold News















