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    मुरथल में बनेगा ओलंपिक मॉडल स्विमिंग पूल

    Olympic Model Swimming, DCRUST, Millions, Haryana

    सुविधा। डीसीआरयूएसटी में 110 करोड़ रूपए की लागत से होगा निर्माण

    • तैयार होगी अंतरराष्ट्रीय स्तर के तैराकों की फौज
    • खिलाड़ियों को दो छात्रावासों की भी मिलेगी सुविधा

    सोनीपत(सच कहूँ न्यूज)। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में ओलंपिक खेलों की तर्ज पर हाईटेक स्विमिंग पूल का निर्माण होने जा रहा है। इस स्विमिंग पूल के बन जाने से न केवल यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिताओं का आयोजन हो सकेगा बल्कि यहां

    अंतरराष्ट्रीय स्तर के तैराकों की फौज भी तैयार की जा सकेगी। 110 करोड़ की लागत से बनने जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्विमिंग पूल में खिलाड़ियों को हॉस्टल की भी सुविधा मिलेगी, साथ ही कर्मचारियों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। विश्वविद्यालय परिसर के भू जल स्तर बढ़ाने के लिए 20 रेन हार्वेस्टिंग रिचार्ज पिट लगाई जाएंगी। वीरवार को विश्वविद्यालय में आयोजित विवि बिल्डिंग कमेटी की 10 वीं बैठक में कुलपति प्रो.टंकेश्वर ने बताया कि बिल्डिंग कमेटी की बैठक में लिए गए सभी निर्णयों को समयबद्ध रूप में साकार कर अमलीजामा पहनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और विद्यार्थियों के हितों का पूरा पूरा ध्यान रखा गया है। बैठक में निर्णय लिया गया है कि वास्तुकला विभाग के लिए स्कूल आॅफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग भवन का निर्माण किया जाएगा। भवन निर्माण में आधुनिक तकनीक व पर्यावरण संबंधित ग्रीन बिल्डिंग मानकों का विशेषतौर पर ध्यान रखा जाएगा।

    8 लेन का होगा स्विमिंग पूल

    स्विमिंग पुल ओलंपिक साइज का होगा, जिसमें 8 लेन होंगी। स्विमिंग पूल अत्याधुनिक सुविधाओं व ओलंपिक मानकों के अनुरूप होगा। इसमें विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा सकता है। इसके 6 अतिरिक्त 6 मंजिला दो छात्रावासों का निर्माण भी किया जाएगा। एक छात्रावास लड़कियों के लिए होगा, जबकि दूसरा छात्रावास लड़कों के लिए बनाया जाएगा। जिनका निर्माण आवश्यक्ता अनुसार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

    बरसात का पानी सहेजेगा विवि

    कुलपति प्रो.टंकेश्वर ने बताया कि विश्वविद्यालय की बिल्डिंग कमेटी ने भू जल स्तर को बढ़ाने के लिए अहम निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय परिसर 273 एकड़ में फैला हुआ है। अब विश्वविद्यालय वर्षा के पानी को बर्बाद नहीं होने देगा। इसके लिए विश्वविद्यालय ने ऐसे 20 स्थान चिन्हित किए हैं, जहां पर वर्षा का पानी एकत्रित होता है। इन 20 स्थानों पर रेन हार्वेस्टिंग रिचार्ज पिट लगाई जाएंगीं तथा वर्षा के पानी का सदुपयोग किया जाएगा।

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