
Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: मुख्त्यार कौर, गाँव दानेवाला जिला श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब) सच्चे दाता रहबर के परोपकार के एक वृतांत का वर्णन करते हुए बताती है कि मेरे बड़े लड़के अमरजीत सिंह की शादी को 15 वर्ष हो चुके थे, परन्तु अभी तक सन्तान नहीं हुई थी। वह मुझे अक्सर कहता था कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के चरणों में सन्तान के लिए अर्ज करो, परन्तु मैं उसकी बात को यह कहकर टाल देती कि मालिक तो अंग-संग है, जब मालिक की रहमत होगी तो सन्तान हो जाएगी। सन् 1985 में पूजनीय परम पिता जी मलोट डेरे में पधारे। MSG Bhandara Month
मजलिस के बाद जब पूजनीय परम पिता जी घूमने जा रहे थे तो अचानक मुझे कहने लगे, ‘‘बेटा, तेरे पोता-पोती सब ठीक हैं।’’ मैंने उदास मन से कहा-पिता जी, मेरे लड़के की शादी हुए 15 वर्ष हो गए हैं, अभी तक उनके कोई सन्तान नहीं हुई। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने मुस्कुराकर कहा, ‘‘बेटा, तुझे एक प्रेम निशानी दे रहे हैं, इसे अपने पोते-पोतियों को पहना देना।’’ उसी समय पूजनीय परम पिता जी ने मुझे एक फ्रॉक तथा कुछ अन्य कपड़े दिए। मैं यह प्रेम-निशानी लेकर फूले नहीं समा रही थी। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर से 15 वर्ष बाद मुझे एक पोता व दो पोतियों का सुख मिला। इस प्रकार सतगुरु अपने जीव की हर जायज माँग को पूरी करते हैं। MSG Bhandara Month














