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    विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस : ब्रेन ट्यूमर के लिए शीघ्र निदान और बेहतरीन उपचार : डॉ. आदित्य गुप्ता

    Brain tumor and spinal cord injuries sachkahoon

    बड़ौत। भारत में ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor) के 28,000 से अधिक मामले हर साल सामने आते हैं और सालाना 24,000 से अधिक लोगों की ब्रेन ट्यूमर के कारण मौत हो जाती है। हर साल 40,000 से 50,000 लोगों में ब्रेन ट्यूमर का पता चलता है जिनमें से 20% बच्चे होते हैं। ब्रेन ट्यूमर के ट्रीटमेंट मोडेलिटी में जबरदस्त प्रगति हुई है, नवीनतम साइबरनाइफ रेडियोसर्जरी सिस्टम को सर्जरी के विकल्प या अन्य उपचार के साथ इस्तेमाल किया जा सकता

    है। साइबरनाइफ के आने के आने से नॉन कैंसरस और कैंसरस ब्रेन ट्यूमर, दोनों के मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत में करीब 3-4 साल से मौजूद तकनीक का उपयोग ज्यादातर शरीर के कैंसरस और नॉन कैंसरस ट्यूमर के उपचार में किया जा रहा है जिसमें प्रोस्टेट, लंग, लीवर आदि शामिल हैं और अब ब्रेन और रीढ़ के ट्यूमर को खतम करने के लिए भी इसका उपयोग किया जा रहा है। Brain Tumor

    रेडिएशन थेरेपी का उद्देश्य हानिकारक सेल्स को नष्ट करना | Brain Tumor

    डॉक्टर आदित्य गुप्ता, डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी एंड साइबरनाइफ सेंटर, आर्टेमिस हॉस्पिटल ने बताया कि साइबरनाइफ रेडिएशन सर्जरी मूल रूप से सबसे एडवांस, नॉन इनवेसिव रेडिएशन थेरेपी टूल्स है जिसका उपयोग खास तौर पर कैंसरस और गैर कैंसरस और अन्य बीमारियों के उपचार में हाई डोज रेडिएशन के प्रिसाइज किरणों की मदद से किया जाता है। यह दर्द रहित और जोखिम रहित डे-केयर ट्रीटमेंट है जिसमें मरीजों को सेशन की समाप्ति के बाद जल्दी से जल्दी डिस्चार्ज कर दिया जाता है, और इसलिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती। उपचार में हाई डोज रेडिएशन की किरण को सीधे ट्यूमर पर ले जाने के लिए इमेज गाइडेंस सिस्टम का उपयोग किया जाता है।

    साइबरनाइफ की अगली पीढ़ी- M6 अधिक सटीक है जब हाल में उपयोग की गई तकनीक से तुलना की गई तब यह पता चला कि इसमें कुछ खास फीचर्स हैं और उच्च सफलता दर के लिए सब मिलीमीटर प्रिसीजन के साथ अलग-अलग कोण से सीधे ट्यूमर पर रेडिएशन की अधिकतम डोज भेजती है। इसके साथ ही तीव्र ऊर्जा वाली एमिटेड फोकस्ड किरणें कैंसर सेल्स को नष्ट कर देती हैं और ट्यूमर के विकास को कम या नियंत्रित कर लेती हैं। यह कैंसर सेल्स के विकास को भी रोकता है। वास्तव में रेडिएशन थेरेपी का उद्देश्य हानिकारक सेल्स को नष्ट करना है जबकि हेल्दी सेल्स को कम से कम नुकसान पहुंचे बिना आमतौर पर, हेड फ्रेम को रोगी की खोपड़ी पर सुबह चढ़ाया जाता है और इसके बाद इमेजिंग स्कैन किया जाता है। Brain Tumor

    छोटी-छोटी दो से पांच डोज रेडिएशन थेरेपी के परिणाम बेहतर दे रही हैं

    रोगी के पास ट्रीटमेंट की प्लानिंग के दौरान हॉस्पिटल में प्रतीक्षा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता और इस दौरान हेड फ्रेम खोपड़ी पर चढ़ा रहता है। इससे भी अधिक ये कि साइबरनाइफ के साथ ट्रीटमेंट फ्लेक्सिबल है, इमेजिंग कुछ दिन पहले ही कर ली जाती है जिससे न्यूरो सर्जन के पास ट्रीटमेंट प्लान तैयार करने और इसे अंतिम रूप देने के लिए पर्याप्त समय होता है। एक बार प्लान सेट हो जाने के बाद मरीज नॉन-इनवेसिव, दर्द मुक्त अनुभव के लिए वापस आ जाएगा। एडवांस ट्यूमर ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए साइबरनाइफ सिस्टम या तो सिंगल हाई डोज ट्रीटमेंट या दो से पांच दिन के भीतर पांच दिन तक छोटे-छोटे डोज देने में सक्षम है। Brain Tumor

    इस अप्रोच से साइड इफेक्ट कम रहते हैं और अधिकतर मरीज उसी दिन अपनी नियमित दिनचर्या में लौटने में सक्षम होते हैं। इसके अलावा क्लिनिकल स्टडी से सामने आया है कि ब्रेन, गला और रीढ़ में कैसर और नॉन कैंसरस कंडीशंस वाले मरीजों में सिंगल लार्ज डोज की तुलना में छोटी-छोटी दो से पांच डोज रेडिएशन थेरेपी के परिणाम बेहतर दे रही हैं।

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