हमसे जुड़े

Follow us

18.1 C
Chandigarh
Saturday, February 7, 2026
More

    हुआ उजाला

    अंधकार की काली चादर,
    धरती पर से सरकी।

    हुआ उजाला जग में कोई,
    बात नहीं है डर की।

    चींची चींचीं चिड़िया बोली,
    डाली पर कीकर की।

    कामकाज बस शुरू हो गया,
    सबने खटर-पटर की।

    लाया है अख़बार ख़बर सब,
    बाहर की, भीतर की।

    घंटी बजी, दूध मिलने में,
    देर नहीं पल भर की।

    मैं सुनता रहता आवाज़ें,
    सभी रसोई घर की।

    मम्मी के जादू से लो जी,
    सीटी बजी कुकर की।

    डॉ. दिनेश दधीचि, कुरुक्षेत्र

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।