हमसे जुड़े

Follow us

20.3 C
Chandigarh
Saturday, February 28, 2026
More
    Home विचार प्रेरणास्रोत मौलाना आजाद :...

    मौलाना आजाद : जिन्होंने जगाई शिक्षा की अलख

    Maulana Azad who raised education
    11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में शिक्षा के विकास में जबरदस्त भूमिका निभाने वाले पहले शिक्षा मंत्री (Maulana Abul Kalam Azad) मौलाना अबुल कलाम आजाद आज ही के दिन पैदा हुए थे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने वाले मौलाना आजाद भारत के बंटवारे के घोर विरोधी और हिन्दू मुस्लिम एकता के सबसे बड़े पैरोकारों में थे।
    हालांकि वह उर्दू के बेहद काबिल साहित्यकार और पत्रकार थे लेकिन शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने उर्दू की जगह इंग्लिश को तरजीह दी, ताकि भारत पश्चिम से कदमताल कर चल सके। 11 नवंबर, 1888 को मक्का में पैदा हुए मौलाना आजाद का मानना था कि अंग्रेजों के जमाने में भारत की पढ़ाई में संस्कृति को अच्छे ढंग से शामिल नहीं किया गया, लिहाजा 1947 में आजादी के बाद शिक्षा मंत्री बनने पर उन्होंने पढ़ाई लिखाई और संस्कृति के मेल पर खास ध्यान दिया। वह भारत के केंद्रीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन थे, जिसका काम केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर शिक्षा का प्रसार था।
    उन्होंने सख्ती से वकालत की कि भारत में धर्म, जाति और लिंग से ऊपर उठ कर 14 साल तक सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए। वह महिला शिक्षा के खास हिमायती थे। उनकी पहल पर भारत में 1956 में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की स्थापना हुई। मौलाना आजाद को एक दूरदर्शी विद्वान माना जाता है, जिन्होंने 1950 के दशक में ही सूचना और तकनीक के क्षेत्र में शिक्षा पर ध्यान देना शुरू कर दिया था।
    शिक्षा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में ही भारत में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी का गठन किया गया। मौलाना आजाद पाकिस्तान के जनक मुहम्मद अली जिन्ना के घोर विरोधी थे और उन्होंने अपनी किताब इंडिया विन्स फ्रीडम में आजादी के बारे में कुछ विवादित हिस्सों को भी छुआ है। 1958 में आखिरी सांस लेने तक वह भारत के शिक्षा मंत्री बने रहे। मौलाना आजाद को 1992 में मरणोपरांत भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।