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    बंद बीमा पॉलिसियों का पैसा दिलाने का लालच देकर 17 लाख की चपत

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    श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। आॅनलाइन शातिर साइबर क्राइम अपराधियों के एक गिरोह ने सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को उसकी बंद 20 बीमा पॉलिसियों का पैसा दिलाने का लालच देकर लगभग 17 लाख की चपत लगा दी। यह आॅनलाइन साइबर गिरोह सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया, बैंकिंग, बीमा कंपनियों और शेयर कंपनियों के अधिकारी बनकर तरह-तरह के लालच देते हुए रकम ऐंठ गया। सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को जब तक आॅनलाइन ठगी का यह सारा खेल समझ में आता, तब तक उसे लाखों का झटका लग चुका था।

    जवाहरनगर थाना पुलिस के मुताबिक अग्रसेननगर निवासी शशिभूषण शर्मा द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर मनोरंजन कुमार, शशांक मित्तल,राजीव रंजन, प्रियंका, आकांक्षा और भानु प्रताप सिंह ठाकुर आदि तथाकथित फर्जी नामों वाले आॅनलाइन शातिर अपराधियों के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का मामला दर्ज किया गया है। शशिभूषण शर्मा ने बताया है कि वह सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी है। उसने विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों से 20 पोलिसियां ले रखी हैं। किसी कारणवश यह पॉलिसियां बंद थीं। इनको शुरू करवाने की वह संबंधित बीमा कंपनियों से कार्यवाही भी कर रहा था। इसी दौरान जून 2020 में मनोरंजन कुमार नामक व्यक्ति ने फोन कर कहा कि वह आईआरडीए का अधिकारी है।वह सभी पॉलिसियों का ब्याज सहित पैसा दिलवा सकता है।

    वह मनोरंजन की बातों में आ गया। उसके द्वारा भेजे गए कुछ फार्म तथा दस्तावेज भरकर कर ई-मेल द्वारा वापिस उसे भेज दिए। कुछ दिन बाद आकांक्षा नाम की लड़की का फोन आया, जिसने बीमा कंपनी का खुद को अधिकारी बताया। आकांक्षा ने कहा कि मनोरंजन ने पेमेंट के लिए फाइल उसे भिजवाई है।उसकी कुल मूल राशि 20 लाख 70 हजार ब्याज सहित 48 लाख 8 हजार रुपए स्वीकृत हो गए हैं। आकांक्षा ने स्टांप ड्यूटी तथा जीएसटी आदि के खर्च के 1 लाख 23 हजार 200 रुपए बताते हुए एक बैंक खाते में जमा करवाने के लिए कहा। मृत्युंजयकुमार सिंह नाम के बैंक खाते में यह राशि उसने जमा करवा दी।

    उसे कहा गया कि 7 दिन पश्चात 48 लाख 8 हजार आपके बैंक अकाउंट में जमा हो जाएंगे। एक सप्ताह इंतजार करने के बाद जुलाई के प्रथम सप्ताह में शशांक मित्तल नामक व्यक्ति मोबाइल फोन पर प्रकट हुआ। खुद को रीजनल हैड नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन आॅफÞ इंडिया, हैदराबाद का अधिकारी बताते हुए 96 हजार 900 रुपए एफआर सर्विस के शुल्क के तौर पर बैंक आॅफ बड़ौदा के खाते में जमा करवाने के लिए कहा। उसने अकाउंट में 91 हजार रूपए निफ्ट द्वारा बताए गए अकाउंट में जमा करवा दिए।

    दो दिन बाद प्रियंका गुप्ता का फोन आया, जिसने फंड ट्रांसफर डिपार्टमेंट, चेन्नई का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसकी बीमा भुगतान संबंधी फाइल एक स्कीम के तहत चुनी गई है। स्कीम के तहत आपको 10 हजार रुपए, आपकी पत्नी को 18 हजार रुपए प्रतिमाह फंक्शन और बेटी को पढ़ाई के लिए 28 हजार रुपए की प्रति वर्ष स्कॉलरशिप स्वीकृत हुई है। इस राशि के लिए प्रियंका द्वारा भेजे गए कुछ फार्म तथा दस्तावेज भरकर मांगी गई 14 लाख 80 हजार 257 रुपए बताए गए बैंक खाते में जमा करवा दिए। प्रियंका ने कहा कि यह राशि मिलने पर आपके और आपकी पत्नी के नाम से उक्त राशि की पेंशन शुरू कर दी जाएगी। हमने बहुत से लोगों को इस तरह से राशि दिलवाई है।

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