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    घर पहुंचे विद्यार्थी बोले, सोचा नहीं था कभी युद्ध में फंस जाएंगे

    Russia Ukraine War

    डीसी बोले, एक-दो दिन में भी सभी छात्र सकुशल लौट आएंगे घर

    सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान यूक्रेन में फंसे जिले के 21 छात्र-छात्राएं अब तक सकुशल घर आ गए है। अभी भी 22 के करीब विद्यार्थी यूक्रेन व अन्य पड़ोसी देशों की सीमाओं पर फंसे हुए है। हुड्डा सेक्टर निवासी भव्यदीप, धोलपालिया निवासी रजत और बप्पा निवासी शाम लाल कंबोज वीरवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे और शाम को सरसा में अपने घर पहुंचे। छात्रों को अपने पास देख परिवार में भी खुशी की लहर छाई हुई है। जिला उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने बताया कि जिला के करीब 43 विद्यार्थी पढ़ाई करने यूक्रेन गये हुए थे और 21 विद्यार्थी वापिस आ चुके है। बाकि विद्यार्थी भी एक-दो दिन में सकुशल घर लौट आएंगे।

    पिता बोले, भगवान ने बेटे को दिया दोबारा जन्म

    भगवान ने बेटे शुभम को दोबारा जन्म दिया है। उसका लाख-लाख धन्यवाद है। यह कहना है गांव बप्पां निवासी शाम लाल कंबोज का जो खुद आरएमपी है और अपने बेटे को एमबीबीएस की पढ़ाई करवाने के लिए पांच साल पहले यूक्रेन भेजा था। शाम लाल का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी परेशानी आ जाएगी। बेटा युद्ध के मैदान में फंस जाएगा।

    जब तक बेटा वहां रहा, हर पल उसकी चिंता सताती रही। वीरवार सुबह जब उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर देखा तो हर पल भगवान का शुक्र मना रहा था कि बेटा सही सलामत घर लौट आया। यूक्रेन की खारकीव यूनिसर्विटी से लौटे शुभम को लेने के लिए उसके पिता शाम लाल के अलावा बहन सरोज, सिमरन, जीजा संदीप, लक्ष्मण दास, भीम सैन इत्यादि भी गए हुए थे। लंबे समय बाद अपनों को देखकर शुभम का चेहरा भी खुशी से खिल गया।

    शुभम बोला, मौत को नजदीक से देखा

    खारकीव यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले शुभम कंबोज ने बताया कि खारकीव में हालात बेहद खराब हो गए थे। यूक्रेन और रूस की सेनाएं आमने-सामने थी। बम, गोलियां, मिसाइलें चल रही थी। सरकार ने एडवाइजरी जारी कर उन्हें खारकीव से निकलने के लिए तो कह दिया परंतु कोई प्रबंध नहीं थे। एंबेसी की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। 40 छात्र अलग-अलग ग्रुप बनाकर गलियों से छिपते हुए निकले। जबकि इजराइल ने अपने छात्रों के लिए स्पेशल बसें लगवाकर उन्हें निकलवा लिया।

    खारकीव से रेलवे स्टेशन आने के लिए पांच छह किलोमीटर युद्ध के मैदान से ही गुजरे। शहर में सेनाएं आमने-सामने थी। रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो और 36 घंटों की यात्रा के बाद लवीव पहुंची। ट्रेन भी रिशेडयूल थी और इधर उधर घूमकर पहुंची। बाद में 20 छात्र टैक्सी कर पोलेंड बार्डर पहुंचे, जिस पर 3100 डालर खर्च आया। शुभम ने बताया कि अभी भी रशियन बार्डर पर 700 के करीब छात्र फंसे हैं, जिनमें से चार सरसा के हैं।

    इवानो यूनिवर्सिटी से लौटे भव्यदीप और रजत

    यूक्रेन में स्थित इवानो फ्रेंकिवस नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में प्रथम वर्ष में पढ़ने वाले भव्यदीप व चौथे वर्ष में पढ़ रहे रजत निवासी धोलपालिया वीरवार शाम सरसा पहुंचे। भव्यदीप मूलरूप से जिले के गांव मटदादू का रहने वाला है और मूल रूप से एचएसवीपी सेक्टर में रहता है। भव्यदीप के पिता रामकुमार व अंकल राकेश कुमार उसे लेने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। भव्यदीप बीते वर्ष ही यूक्रेन गया था। उसने बताया कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि वहां युद्ध भी भड़क सकता है। इवानो यूक्रेन के पश्चिमी तरफ है। वहां से निकलने के लिए उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी। निजी बस लेकर रोमानिया बार्डर तक पहुंचे।

    बस बार्डर से 12 किलोमीटर पहले ही रूक गई। उसके बाद 12 किलोमीटर पैदल चले। कड़ाके की ठंड व बर्फवारी के बीच वे मुश्किल से बार्डर पर पहुंचे। रोमानिया बार्डर क्रास करने में उन्हें 50 घंटे लगे। रोमानिया बार्डर पर यूक्रेनी सैनिक यूक्रेनी व पश्चिमी देशों के नागरिकों को आसानी से बार्डर पार करवा रहे थे जबकि भारतीय व नाइजीरियन को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ी। इंडियन एंबेसी की तरफ से भी ज्यादा मदद नहीं मिली। भव्यदीप के पिता रामकुमार वर्मा आइटीआइ में प्लेसमेंट आफिसर है, जबकि माता पीजीटी पोलसाइंस की अध्यापिका है। उन्होंने बताया कि बेटा सुरक्षित लौट आया, बहुत खुशी हुई है। पिछले कई दिनों से चिंता सता रही थी। पिछले तीन दिनों से बेटा रोमानिया बार्डर पर था।

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