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    ‘‘बेटा, क्या बात है? हम तेरा बाल भी बांका नहीं होने देंगे। तू बेफिक्र होकर सोजा।’’

    Shah Satnam Singh Ji

    मैं पंजाब रोडवेज में हैड कैशियर के पद पर कार्य करता था। मैंने 20 जून 1986 को 50 हजार रूपये किसी से उधार लिए और दफ्तर में ही एक लोहे के डिब्बे में रखकर अपना ताला लगा दिया। शाम को मैं घर आ गया। मेरे साथ जो सहायक कैशियर था उसकी ड्यूटी रात को 8 बजे तक थी। सरकारी रूपये जो 2 लाख 36 रूपये थे, उसमें से 2 लाख तो उसने सरकारी तिजोरी में रख दिए और 36 हजार रूपये मेज के दराज में रखकर घर चला गया, रात को एक बजे मुझे सपना आया कि कोई हमारी दीवार को तोड़ रहा है मैं बुरी तरह से डर गया। मेरी पत्नी ने मुझे पानी पिलाया और मैं फिर से सो गया। फिर करीब 2 बजे मुझे फिर से सपना आया कि कुछ आतंकवादी मुझे मारने आ गए। मैंने जैसे ही चीख मारी तो पूजनीय परम पिता जी ने मुझे दर्शन दिए और फरमाने लगे, ‘‘बेटा, क्या बात है? हम तेरा बाल भी बांका नहीं होने देंगे। तू बेफिक्र होकर सोजा।’’ उसके बाद मैं सो गया। सुबह 5 बजे मैं अपनी पत्नी को सारी बात बता ही रहा था कि मेरे कार्यालय से एक कर्मचारी आया और उसने बताया कि रात दफ्तर में चोरी हो गई। मैं उसी समय दफ्तर आया और देखा कि दीवार टूटी हुई है और पुलिस निरीक्षण कर रही है। थानेदार ने बताया कि आपके कैशियर का 36 हजार रूपये का नुक्सान हुआ है लेकिन मेरा बक्सा सुरक्षित था। पूजनीय परम पिता जी ने सपने में मुझे सबकुछ दिखाया और मेरा बाल भी बांका नहीं होने दिया।
    श्री मनोहर लाल,
    श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब)

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