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    उपलब्धि: पर्लमीत इन्सां ने बनाया एक और एशिया बुक और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड

    • अद्भुत बुद्धि कौशल से तीन शताब्दियों की अलग-अलग तारीख के दिन बताए चुटकियों में

    • 10 वर्ष की आयु में स्थापित किया दूसरा रिकॉर्ड

    • 7 साल, 11 माह की आयु में पेरियॉडिक टेबल का बनाया था रिकॉर्ड

    सरसा (सच कहूँ न्यूज)। ‘होनहार बिरवान के होत चिकने पात’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए सरसा की रहने वाली पर्लमीत इन्सां ने तीन शताब्दियों के बीच में आने वाली अलग-अलग तारीखों पर पड़ने वाले दिनों के बारे में बताकर एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। इसकी बदौलत दूसरी बार इस होनहार बालिका का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स व इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। ज्ञात रहे कि पर्लमीत इन्सां डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पौत्री हैं। सेंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल, सिरसा में 6वीं में पढ़ने वाली छात्रा पर्लमीत इन्सां को पढ़ाई के साथ-साथ नई-नई चीजें करने और सीखने का भी जुनून रहता है।

    भाई जसमीत सिंह जी इन्सां व हुस्नमीत कौर जी इन्सां ने बताया कि उनकी बेटी पर्लमीत इन्सां बचपन से ही बेहद कुशाग्र बुद्धि हैं। उन्होंने बताया कि पर्लमीत ने 10 वर्ष की आयु में सन् 1800 से 2099 तक के कैलेंडर वर्षों के बीच की अलग-अलग तारीखों की अपने बुद्धि कौशल से गणना करके हल निकाला, यानि उस तारीख पड़ने वाले दिन को पलक झपकते ही बता दिया। जो कि एक रिकॉर्ड है। इस रिकॉर्ड की पुष्टि एशिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स व इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स ने कर पर्लमीत को सर्टिफिकेट जारी किए हैं।

    जसमीत सिंह जी इन्सां के अनुसार पर्लमीत इन्सां ने इससे पूर्व सात साल एवं 11 महीने की आयु में मात्र 38 सैकिंड में ही पूरी ‘पेरियॉडिक टेबल’ सुनाकर नया रिकॉर्ड बनाया था। इतनी कम उम्र के बच्चे की प्रतिभा को देख इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के सदस्य भी बेहद प्रभावित थे। उनका कहना था कि पर्लमीत इन्सां का इतने कठिन शब्दों को याद करना और सहजता से उच्चारण व बोलने की स्पीड अद्भुत है। पेरियॉडिक टेबल सुना कर रिकॉर्ड स्थापित करने पर इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स की ओर से उन्हें प्रशंसा पत्र एवं एक गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया था।

    पर्लमीत इन्सां की इस सफलता से न केवल स्कूल एवं माता-पिता खुश हैं बल्कि पूरा सरसा अपने जिले की इस उपलब्धि पर गदगद है।

    पर्लमीत इन्सां ने ज्यूरी द्वारा सन् 1800 से 2099 तक के कैलेंडर वर्षों के बीच की अलग-अलग 56 तारीखों पर पड़ने वाले वाले दिनों के नाम को चुटकियों में बताकर सभी को हैरान कर दिया। इतनी कम आयु में इस अद्भुत बुद्धि कौशल की धनी पर्लमीत की ज्यूरी के सदस्यों ने जमकर तारीफ की। उनका कहना था कि बालिका का बुद्धि कौशल कमाल है। पर्लमीत पढ़ाई के साथ-साथ घुड़सवारी व सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हिस्सा लेती रहती है।

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