हमसे जुड़े

Follow us

29.3 C
Chandigarh
Friday, February 27, 2026
More
    Home न्यूज़ ब्रीफ संयुक्त राष्ट...

    संयुक्त राष्ट्र की भूमिका

    Palestine, united nations

    भारत सहित कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार नहीं होने पर असंतुष्टि प्रकट की है। इस अंतर्राष्टÑीय संस्था में सुधारों को तत्काल आवश्यकता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इस संगठन की स्थापना की गई थी, उसे संपूर्ण करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। यह भी कहा जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में कुछ शक्तिशाली देशों का दबदबा है। कई दशकों से चल रहा यह संगठन विभिन्न देशों के बीच चल रहे युद्धों को रोकने में नाकाम रहा है। यही कारण है कि विश्व स्तरीय आतंक से निपटने में देरी हो रही है। आतंकवाद संबंधी एक परिभाषा, नीति व मापदंड तय नहीं होने के चलते सही समय पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। एक देश के आतंकवादी को दूसरा देश भगौड़ा घोषित कर रहा है। जिस देश को आतंकवाद से निपटने के लिए वित्तीय मदद मिल रही है, वही देश आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।

    इन परिस्थितियों में आतंकवाद के खिलाफ तय किए जाने वाले कार्यक्रम व निर्णय कोई सही परिणाम नहीं देते। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की काऊंसिल समिति का सदस्य चीन भारत को कई आतंकियों को विश्व आतंकी घोषित करने में अड़चन पैदा करता रहा है। आतंकी हमलों की धमकियां देने वाले आतंकी सरगना सरेआम घूम रहे हैं। यदि अमन-शांति को कायम रखने वाली संस्था का सदस्य देश ही आतंकियों का बचाव करेगा तब अमन-शांति की उम्मीद करना बेतुकी बात है। जो देश आतंकवाद का खुलकर समर्र्थन करते हैं उनकी मंशा पर भी विचार होना चाहिए। आतंकवाद को समाप्त करने के मुद्दे पर एकजुटता हर हाल में आवश्यक है। सुरक्षा काऊंसिल में कुछ देशों का दबदबा व मनमानी नहीं चलनी चाहिए।

    विश्व की बदल रही परिस्थितियों के अनुसार इसमें भी बदलाव होना चाहिए। भारत विश्व का उभरता देश है व देश की अर्थव्यवस्था विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। भारी अपनी मजबूती, अंतराष्टÑीय स्थिति व परिस्थितियों के मद्देनजर सुरक्षा काऊंसिल की स्थायी सदस्यता का हकदार है। इसके बावजूद भारत को दरकिनार किया जा रहा है। विश्व में आतंकवाद व देशों के आपिसी टकराव को रोकने के लिए भारत संयुक्त राष्टÑ के स्थायी सदस्य के रूप में बेहतर भूमिका निभा सकता है। संयुक्त राष्टÑ में बदलाव व सुधार आवश्यक है, इसमें देरी विश्व का नुक्सान कर रही है।

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here