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    गांव पथराला में दो जलघर होने के बावजूद भी पानी को तरस रहे ग्रामीण

    5 पानियों की धरती के लागे भी पीने वाले पानी को लेकर हो रहे परेशान

    • घरों में पानी सप्लाई करने के लिए टैंकर चालक वसूल रहे प्रति टैंकर 500 से 1000 रुपये तक किराया

    संगत मंडी/बठिंडा। (सच कहूँ/सुखतेज धालीवाल) स्थिति तो पंजाब के बहुत से गांवों की यही है लेकिन गांव पथराला के वासियों की हालत तो इससे भी बदतर हो रही है। जिला बठिंडा के इस गांव के लोग जरूरी काम धंधे छोड़कर धरने लगाने की योजनाएं बना रहे हैं। यह धरने नरमे के नुक्सान का मुुआवजा मांगने या बुरे कीटनाशकों के खिलाफ नहीं बल्कि खाली पड़े पानी के घड़ों को पानी से भरने के लिए लगाए जा रहे हैं।  बठिंडा-डबवाली मुुख्य मार्ग पर स्थित संगत ब्लॉक के गांव पथराला में दो जलघर होने के बावजूद लोग पीने वाले पानी को तरस रहे हैं।

    गांव के दोनों जलघरों की बदतर हालत के कारण ग्रामीणों को हर समय पीने के पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। उक्त गांव टेल पर होने कारण पहले ही नहरी पानी की कमी रहती है, जिस कारण गांव में एक दर्जन के करीब पानी लेकर आने वाले टैंकर बने हैं, जो घरों में पानी की सप्लाई करने का किराया प्रति टैंकर 500 से 1000 रुपये तक वसूलते हैं परंतु गर्मियों में एक टैंकर से सप्ताह भर भी नहीं निकलता।

    रेलवे स्टेशन के नजदीक जलघर के पानी स्टोर टैंक के नजदीक लगे सफैदे के पेड़ों के पत्तों से पानी गन्दा होने के डर से जलघर कमेटी ने पिछले 4 सालों से इसमें पानी ही नहीं डाला और रजबाहे से जलघर तक की पाईप में भी रेत फंसी होने के कारण पानी टैंकों तक बहुत कम मात्रा में पहुंचता है, जिस कारण नहरबन्दी के समय भयानक जल संकट पैदा हो जाता है। वहीं मुख्य मार्ग के नजदीक जलघर पानी का स्टोर टैंक भी कंडम होने के कारण गांववासी पीने के पानी को तरस रहे हैं।

    गांववासियों ने संघर्ष शुरू करने की दी चेतावनी

    बीकेयू उगराहां के ब्लॉक प्रधान कुलवंत राए शर्मा और ब्लॉक नेता अजयपाल सिंह घुद्दा ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा विश्व बैंक की हिदायतों के तहत जल नीति-2012 लागू कर गांवों के जलघर पंचायतों के हवाले किए जा रहे हैं और भूमिगत और दरियाओं का जहरीला पानी पीने के लिए लोगों को मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल संकट दौरान साम्राज्य कम्पनियों को सस्ता पानी देकर लोगों की आर्थिक लूट के लिए कम्पनियोंं की लगाम खुली छोड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि जल नीति-2021 के तहत श्रम लोगों से पानी के मालकी हक छीनने के कानून लागू करने की योजना बनाई जा रही है और पानी व्यापारिक वस्तु में तबदील कर मुनाफे बटोरने की योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

    उन्होंने गांववासियों को उक्त मांगों संबंधी प्रशासन पर दवाब बनाने के लिए संघर्ष शुरू करने का आह्वान किया और गांव कमेटी के फैसले के तहत 24 नवंबर को सुबह 11 बजे गांव में सांझी जगह एकत्रित होकर रैली उपरांत ब्लॉक विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

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