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    एड्स पीड़ित मामलों में 70 फीसदी नशे के आदी

    HIV Positive

    एड्स दिवस पर विशेष

    • नशे रूपी दैत्य और जागरूकता की कमी ‘एड्स’ मामलों मे विस्तार का मुख्य कारण
    • सिर्फ एड्स दिवस मौके ही लगाए जाते हैं जागरूकता कैंप और सैमीनार

    बरनाला। (सच कहूँ/जसवीर सिंह गहल/राजिन्द्र शर्मा) भले ही मनुष्य खुद को पढ़ा-लिखा और कम्प्यूटर के युग में प्रवेश करने का दावा कर रहा है लेकिन अभी भी खुद को पढ़ा-लिखा समझने वाले मनुष्य में जागरूकता की बड़ी कमी है, जो ‘एड्स’ जैसी नामुराद बीमारी के मामलों में इजाफे का कारण बन रही है। इसके साथ ही पंजाब को घुन की तरह अंदर ही अंदर खा रहा नशा भी एड्स के मामलों में विस्तार करने का मुख्य कारण बनता जा रहा है। इसे रोकने के लिए संबंधित विभागों द्वारा केवल ‘एड्स’ दिवस मौके ही लगाए जा रहे जागरूकता कैंप, सैमीनार खानापूर्ति ही साबित हो रहे हैंं। एड्स सबंधी स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त हुए आंकड़ें हैरान करने वाले हैं।

    अप्रैल 2022 से नवम्बर 2022 तक के प्राप्त हुए विवरणों मुताबिक मौजूदा समय में एड्स के मामलों में हो रहे विस्तार का मुख्य कारण आम लोगों में एड्स प्रति जागरूकता की कमी और नशे (सिथैंटक) का बढ़ रहा इस्तेमाल है। अब अगर बात जिला बरनाला की करें तो यहांं पिछले सालों के मुकाबले पॉजिटिव मामलों में विस्तार दर्ज किया गया है, जो सिर्फ और सिर्फ युवा पीढ़ी में पाए जा रहे हैं।

    इन मामलों में 70 फीसदी पीड़ित नशे के आदी हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सरकारी नशा छुड़ाओ केन्द्रों में नशा छोड़ने आने वाले मरीजों में एड्स का टैस्ट लाजमी किया गया है, जिनमें अधिकतर एड्स के पॉजिटिव मामले सामने आ रहे हैं। दर्ज आंकड़ों में खुद-ब-खुद अस्पताल पहुंंचकर टैस्ट करवाने वालों की गिणती नामात्र ही है, जिससे जागरूकता की कमी का स्पष्ट प्रमाण मिलता है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक जिले में कई एड्स पीड़ित दम्पति से पैदा हुए बच्चों की रिपोर्ट नैगेटिव आई है।

    काऊंसलिंग स्टाफ की कमी

    जिला बरनाला में आम लोगों में एड्स प्रति जागरूकता की कमी का कारण काऊंसलिंग स्टाफ की कमी भी है। जानकारी के अनुसार तीन कर्मचारी ही हैं, जिनमें दो पूरे कार्यालय का काम काज देखने के साथ-साथ लोगों को समय-समय पर जागरूक करने का फर्ज भी निभा रहे हैं। जबकि एक टैस्टिंग करने का काम कर रहा है। इसमें एक लैब टैक्निशियन का पद रिक्त पड़ा है। यह भी पता चला है कि बरनाला में सिर्फ एक ही एनजीओ है।

    हर किसी को करवाना चाहिए टैस्ट

    स्वास्थ्य विभाग मुताबिक एड्स की बीमारी से बचने के लिए हर किसी को जहां अपना टैस्ट जरूरी करवाना चाहिए, वहीं नयी जिन्दगी की शुरूआत मौके अपने जीवन साथी को इस संबंधी पहले ही जागरूक करना चाहिए। विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए तरीके से करवाया गया इलाज आगे पैदा होने वाले बच्चे को इस बीमारी से बचा सकता है।

    क्या कहते हैं आंकड़े

    स्वास्थ्य विभाग बरनाला से प्राप्त हुए आंकड़ों अनुसार पिछले सालों में जो आंकड़े 168 थे, साल 2022 में बढ़कर 175 पर पहुंच गए हैं। इन आंकड़ों में जहां 174 पीड़ितों की आयु 18 से 27 साल के करीब है, वहीं एक गर्भवती महिला भी शामिल है। प्राप्त आंकड़ों मुताबक जिले में 6-7 एड्स पीड़ित दम्पतियों से पैदा हुए बच्चों की रिपोर्ट नैगेटिव आई है।

    बरनाला में एआरटी सैंटर जल्द

    सिविल सर्जन बरनाला डॉ. जसबीर सिंह औलख ने कहा कि हर किसी को पवित्र गुरबानी में दर्ज उपदेश पर चलकर जीवन व्यत्तीत करना चाहिए। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा जल्द ही जागरूकता कैंप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एड्स पीड़ितों के लिए एआरटी सैंटर बरनाला में जल्द ही शुरू होने जा रहा है।

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