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Saturday, February 28, 2026
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    भंडारे का रूहानी नजारा शाह सतनाम जी धाम से Live लूट लो खुशियाँ

    Dera Sacha Sauda

    सरसा। रूहानियत और समाज सेवा के विश्व कीर्तिमान स्थापित करने वाले डेरा सच्चा सौदा के पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के 104वें पावन अवतार दिवस का ‘एमएसजी भंडारा’ बुधवार को डेरा सच्चा सौदा की करोड़ों साध-संगत ने धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया। इस अवसर पर जहां शाह सतनाम जी धाम में पावन भंडारा एमएसजी के रंग में रंगा नजर आया। वहीं सैकड़ों एकड़ में बनाए गए विशाल पंडाल श्रद्धालुओं के उत्साह के समक्ष छोटे पड़ गए। डेरा सच्चा सौदा की ओर आने वाले सभी मार्गों पर श्रद्धालु ही नजर आ रहे थे।

    एमएसजी भंडारे पर गुरुभक्ति, देशभक्ति और भारतीय संस्कृति और संस्कारों का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर पूज्य गुरु जी के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे मानवता भलाई कार्यों के तहत जरूरतमंदों की मदद की गई। वहीं मंदबुद्धियों की सार-संभाल और उपचार के बाद सकुशल घर पहुंचाने में पहले स्थान पर रहे राजस्थान के ब्लॉक केसरीसिंहपुर, दूसरे स्थान पर रहे संगरियां और तीसरे स्थान पर रहे पंजाब के ब्लॉक सुनाम को पूज्य गुरु जी ने सुंदर ट्राफियां देकर सम्मानित किया। इसके अलावा पूज्य गुरु जी ने अपनी वेबसाइट ‘सेंट डॉ. एमएसजी इन्सां डॉट मी’ को रिलॉन्च किया, जिसमें नशों के खिलाफ चलाई गई डेप्थ मुहिम से संबंधित नंबर 80596-02525 जारी किया गया। इस नंबर व वेबसाइट पर कोई भी नशा छोड़ने वाला संपर्क कर सकता है।

    बता दें कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने 25 जनवरी 1919 को श्रीजलालआणा साहिब, जिला सरसा ( हरियाणा) में पावन अवतार धारण किया था। एमएसजी भंडारे को लेकर डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत में अनुपम श्रद्धा, अद्वितीय विश्वास और अद्भुत जोश व ज़ज्बा देखने को मिला। मंगलवार दोपहर से ही शाह सतनाम जी धाम व शाह मस्ताना जी धाम में साध-संगत का आना शुरू हो गया, जो कि भंडारा समाप्ति तक अनवरत जारी रहा। संगत के लिए बनाए मुख्य पंडाल भरने पर आश्रम की सैकड़ों एकड़ जमीन बनाए गए। इसके साथ ही स्कूल के ग्राउंड और क्रिकेट स्टेडियम के बड़े मैदान में संगत के बैठने का प्रबंध किया गया। इसी तरह शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नजदीक एक विशाल पंडाल बनाया गया। उधर शाह मस्ताना जी धाम के पंडाल में भी पैर रखने की जगह नहीं थी। इन सभी पंडालों के भर जाने के बाद आश्रम की खेती वाली जमीन पर साध-संगत पर भी पंडाल बनाए गए।

    sirsa

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