हमसे जुड़े

Follow us

11.7 C
Chandigarh
Saturday, February 7, 2026
More

    Fake NOC for Organ Transplant: ऑर्गन ट्रांसप्लांट की फर्जी एनओसी देने वाले तीन गिरफ्तार

    Jaipur News

    Fake NOC for Organ Transplant: जयपुर (सच कहूं न्यूज)। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital) में रुपए लेकर अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) की फर्जी एनओसी देने वाले को गिरफ्तार किया है। एसीबी टीम ने रविवार देर रात 1.30 बजे कार्रवाई करते हुए फर्जी एनओसी देने वाले सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह और ईएचसीसी अस्पताल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर अनिल जोशी को लेनदेन करते रंगे हाथ पकड़ा। एसीबी ने मौके से 70 हजार रुपए और 3 फर्जी एनओसी लेटर भी जब्त किए हैं। Jaipur News

    कार्रवाई के बाद रात को ही एसीबी के अधिकारी गौरव सिंह और अनिल जोशी के घर और अन्य ठिकानों पर भी सर्च करने के लिए गए। सर्च की कार्रवाई सोमवार सुबह 5 बजे तक चली। एसीबी को गौरव सिंह के घर से 100 से अधिक फर्जी सर्टिफिकेट मिले हैं। किसी भी सर्टिफिकेट पर साइन और मुहर नहीं थी, लेकिन इन पर अस्पतालों के नाम लिखे थे। उधर, यह भी सामने आया है कि सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह को 20 मार्च को अंग प्रत्यारोपण संबंधी यूनिट से हटाकर सवाई मानसिंह अस्पताल में संपर्क पोर्टल शिकायत निवारण यूनिट में लगाया गया था। हालांकि उसने जॉइन नहीं किया था।

    तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 4 दिन की रिमांड पर लिया | Jaipur News

    गौरव सिंह को सोमवार को अस्पताल प्रशासन ने सस्पेंड कर दिया। एसीबी ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट की फर्जी एनओसी मामले में फोर्टिस अस्पताल के को-ऑर्डिनेटर विनोद सिंह को भी गिरफ्तार किया है। विनोद सिंह ने भी रिश्वत देकर फर्जी एनओसी बनवाई थी। एसीबी ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 4 दिन की रिमांड पर लिया है।

    एसीबी एडीजी हेमंत प्रियदर्शी ने बताया कि एसीबी के पास तीन दिन पहले एसएमएस अस्पताल के अधिकारी ने शिकायत दी थी। उन्होंने शिकायत में बताया था कि अस्पताल में कोई अंग प्रत्यारोपण के फर्जी एनओसी सर्टिफिकेट बिना कमेटी की बैठक के जारी कर रहा है। ये लोग पैसा लेकर फर्जी सर्टिफिकेट दे रहे हैं। बिना कमेटी के जारी इन सर्टिफिकेट की कोई वेल्यू नहीं है। ये लोग निजी अस्पतालों से सांठ-गांठ कर पैसा कमाने के लिए यह सब कर रहे हैं।

    एडीजी ने बताया- सूचना के बाद एसीबी के डीआईजी रवि के नेतृत्व में टीम बनाई गई। टीम ने गोपनीय तरीके से संदिग्ध अधिकारी की पहचान की और पीछा करना शुरू कर दिया। रविवार देर रात एसएमएस अस्पताल के सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह और ईएचसीसी अस्पताल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर अनिल जोशी को एनओसी के बदले लेन-देन करते समय पकड़ लिया।

    जांच में सामने आया कि सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह रिश्वत के बदले पिछले कई महीनों से कमेटी के सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए फर्जी एनओसी बनाकर कई अस्पतालों को दे चुका है। एसीबी डीजी राजीव शर्मा ने बताया कि एसीबी ने इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करते हुए 3 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके आॅफिस की तलाशी लेकर महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। उनके आॅफिस से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

    ईएचसीसी अस्पताल ने आरोपी को किया सस्पेंड

    अंग प्रत्यारोपण से पहले फर्जी एनओसी देने के मामले में ईएचसीसी अस्पताल ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर अनिल जोशी को सस्पेंड कर दिया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनकी ओर से आंतरिक जांच की जा रही है। साथ ही वह एसीबी को जांच में पूरा सहयोग करेंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई।

    बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव ने रिश्वत लेकर अंग प्रत्यारोपण की फर्जी एनओसी देने के प्रकरण में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उच्च स्तरीय कमेटी से प्रकरण की जांच करवाने और 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है और मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 के तहत ईएचसीसी अस्पताल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट का लाइसेंस सस्पेंड करने की कार्रवाई भी की जा रही है। एसएमएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा ने कहा- ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक सतत प्रक्रिया है।

    हम केवल मरीज के ब्लड रिलेशन वाले को ही एनओसी देते हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव बगरहट्टा, ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज डॉ. अनुराग धाकड़, कार्डियक सर्जन डॉ. रामगोपाल यादव, एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा, एक-एक डॉक्टर नेफ्रोलॉजी और गेस्ट्रॉलोजी। इनके अलावा दो सामाजिक कार्यकर्ता जो अंगदान के क्षेत्र में काम करते हैं। Jaipur News

    Railways: ये ट्रेन रहेगी रद्द, आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है!

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here