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    Haryana News: हरियाणा सरकार की तैयारी पूरी, 5 नए जिलों के गठन की प्रक्रिया शुरू, कई गांव होंगे इधर से उधर

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    Haryana News: हरियाणा सरकार की तैयारी पूरी, 5 नए जिलों के गठन की प्रक्रिया शुरू, कई गांव होंगे इधर से उधर

    Haryana News:  चंडीगढ़ अनु सैनी। हरियाणा सरकार ने प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुचारु बनाने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में राज्य सरकार जल्द ही पांच नए जिलों के गठन की घोषणा करने जा रही है। इससे सबसे बड़ा प्रभाव हरियाणा के दिल माने जाने वाले जींद जिले पर पड़ेगा, जो अब तीन हिस्सों में बंट जाएगा। जींद से सफीदों और गोहाना को अलग जिलों के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जिससे जिले का भौगोलिक व राजनीतिक स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है।

    हांसी, सिरसा, गोहाना, सफीदों और असंध बन सकते हैं नए जिले | Haryana News

    राज्य सरकार ने जिन पांच नए जिलों के गठन की योजना बनाई है, उनमें हिसार का हांसी, सिरसा का डबवाली, करनाल का असंध, जींद का सफीदों और सोनीपत का गोहाना शामिल हैं। इन क्षेत्रों को प्रशासनिक रूप से अलग जिला बनाए जाने के लिए सरकार ने रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। संबंधित जिलों के उपायुक्तों से अंतिम रिपोर्ट मांगी गई है।

    जींद का बंटवारा तय, सफीदों और गोहाना की तैयारी पूरी

    हरियाणा की राजनीति में खास पहचान रखने वाला जींद जिला अब बंटने जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जींद जिले से दो जिले निकलकर सामने आएंगे — सफीदों और गोहाना। इस प्रक्रिया में जींद जिले की कई पंचायतें व गांव नए जिलों में चले जाएंगे। इससे जींद का राजनीतिक प्रभाव भी प्रभावित होगा।
    गौरतलब है कि हरियाणा की राजनीति में जींद का विशेष स्थान रहा है। कई बड़े राजनीतिक दलों की शुरुआत जींद से ही हुई है। लेकिन दो नए जिले बनने के बाद जींद का राजनीतिक भूगोल पूरी तरह बदल सकता है।
    गांवों का बड़ा फेरबदल, जुलाना और सफीदों के गांव शामिल होंगे गोहाना में
    नए जिलों के गठन के लिए गांवों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस प्रक्रिया में जींद के जुलाना उपमंडल और सफीदों उपमंडल के कई गांव गोहाना जिले में शामिल किए जाएंगे।
    प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, जुलाना उपमंडल के सात गांव पहले ही प्रस्तावित किए जा चुके हैं, जिनमें शामिल हैं:
    डिंगाना
    नंदगढ़
    लजवाना खुर्द
    लजवाना कलां
    सिरसा खेड़ी
    फतेहगढ़
    मेहड़ा
    इन गांवों को गोहाना में शामिल किए जाने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, इन गांवों के लोगों ने इस फैसले का विरोध भी जताया है।
    सफीदों के 22 गांव होंगे पुनर्गठित, कभी गोहाना में जाने थे, अब सफीदों में मिलेंगे
    सफीदों को जिला बनाए जाने की चर्चा लंबे समय से चल रही है। प्रशासन ने शुरुआत में सफीदों के 22 गांवों को गोहाना जिले में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था। इनमें प्रमुख गांव हैं:
    अटा
    कारीखानी
    हीट
    हरिगढ़
    ऐंचरा खुर्द
    सरफाबाद
    ऐंचरा कलां
    बारह कलां
    बाग खुर्द
    हाडवा
    भागखेड़ा
    सिवानामाल
    भंभेवा
    मालसरीखेड़ा
    लुधाना
    मोरखी
    भिड़ताना
    गांगोली
    कलावती
    बुटानी
    होथियापुर
    लेकिन अब ताजा स्थिति यह है कि इन गांवों को सफीदों जिले में ही रखा जाएगा, जिससे गोहाना जिले में जाने वाले गांवों की संख्या में कुछ कमी आएगी।

    गोहाना जिले में कुल 29 से अधिक गांव होंगे शामिल

    गोहाना को नया जिला बनाए जाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। गोहाना जिले में जींद जिले के जुलाना और सफीदों उपमंडल के मिलाकर कुल 29 से अधिक गांवों को शामिल किया जाएगा। इससे गोहाना का भौगोलिक क्षेत्र भी बढ़ेगा और प्रशासनिक दृष्टि से यह नया जिला प्रभावशाली होगा।

    सफीदों अब समिति की सूची में, पिल्लूखेड़ा के गांव भी हो सकते हैं शामिल*

    हाल ही में सफीदों को नई जिला कमेटी की सूची में शामिल कर लिया गया है। पहले जब यह प्रस्ताव चर्चा में था, तब सफीदों सूची में नहीं था। लेकिन अब इसे शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा, पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के गांवों को भी सफीदों में मिलाने की योजना है।
    वहीं गोहाना उपमंडल की सीमा से लगते हुए कुछ गांवों को भी गोहाना में मिलाया जा सकता है, जो कि प्रशासनिक दृष्टि से सुविधाजनक होगा।

    नई जिलों के गठन के पीछे कारण

    हरियाणा सरकार का मानना है कि जिलों की संख्या बढ़ाने से प्रशासनिक व्यवस्था सशक्त और सरल होगी। इसके साथ ही नागरिकों को अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं, नई तहसीलों और उपमंडलों के गठन से स्थानीय विकास कार्यों में तेजी आएगी।

    राजनीतिक असर: जींद का प्रभाव कमजोर होने की आशंका

    हरियाणा की राजनीति में जींद का एक विशेष स्थान रहा है। लेकिन दो नए जिले निकलने के बाद जींद की राजनीतिक हैसियत में कमी आ सकती है। विशेषकर जब जींद के कई प्रभावशाली गांव नए जिलों में चले जाएंगे, तो वहां के वोट बैंक और प्रतिनिधित्व की दिशा भी बदल सकती है।

    जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया

    गांवों के पुनर्गठन को लेकर जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कुछ गांवों के लोग नए जिलों में शामिल होने को लेकर उत्साहित हैं, क्योंकि इससे उन्हें अपने कार्य निपटाने में सुविधा होगी। वहीं कई गांवों में विरोध भी सामने आया है, जो अपने पुराने जिलों से जुड़ाव नहीं छोड़ना चाहते।
    हरियाणा सरकार की यह पहल जहां प्रशासनिक दृष्टि से सराहनीय कही जा सकती है, वहीं इसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी गहरा होगा। जींद, सफीदों और गोहाना का नया स्वरूप हरियाणा के मानचित्र को बदल देगा। अब देखना यह है कि सरकार किस तेजी और किस संतुलन के साथ इस योजना को ज़मीनी स्तर पर उतारती है।