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    Vehicle Scrappage Policy Benefits: अच्छी खबर, इतने साल पुरानी गाड़ियां नहीं होगी कबाड़, सरकार ने बनाया नया नियम

    Vehicle Scrappage Policy Benefits
    Vehicle Scrappage Policy Benefits: अच्छी खबर, इतने साल पुरानी गाड़ियां नहीं होगी कबाड़, सरकार ने बनाया नया नियम

    Vehicle Scrappage Policy Benefits:  भारत में आॅटो इंडस्ट्री को पर्यावरण संरक्षण के दिशा में और अधिक संवेदनशील बनाने के लिए सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण कदम वाहन स्क्रैपिंग और री-साइकिलिंग से संबंधित है। कुछ साल पहले सरकार ने पुराने वाहनों के स्क्रैपिंग के लिए एक नीति लागू की थी, और अब यह कदम और भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इस नई नीति के तहत, अब वाहन कंपनियों को अपने नए वाहनों के निर्माण में स्टील के रूप में री-साइकिल किए गए धातु का उपयोग करना होगा। इस नियम के तहत, कंपनियों को 2005-06 में बेची गई कारों में इस्तेमाल किए गए स्टील का कम से कम 8% हिस्सा री-साइकिल करना अनिवार्य होगा। भविष्य में इस प्रतिशत को बढ़ाकर 18% तक किया जा सकता है।

    नए नियमों के तहत पुराने वाहनों से निकाला गया स्टील, नए वाहनों में इस्तेमाल होगा | Vehicle Scrappage Policy Benefits

    नए नियमों के तहत पुराने वाहनों से निकाला गया स्टील, नए वाहनों में इस्तेमाल होगा। यह कदम न केवल स्टील के खनन से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा, बल्कि नए स्टील की खरीद पर होने वाले खर्चों को भी कम करेगा। कंपनियां अपनी पुरानी गाड़ियों के स्टील का उपयोग करेंगी, जिन्हें उनके मालिक ने स्क्रैप कर दिया है या जो पूरी तरह से समाप्त हो चुकी हैं। यह प्रक्रिया पर्यावरण पर दबाव को कम करने के साथ-साथ स्टील के पुन: उपयोग को भी बढ़ावा देगी, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होगी।

     ग्राहकों से पुराने वाहन खरीदकर उन्हें स्क्रैप कर सकती हैं

    नई नीति के अनुसार, वाहन कंपनियों को या तो रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग डीलर्स से स्टील खरीदना होगा, या फिर उन्हें अपनी खुद की स्क्रैपिंग और री-साइक्लिंग यूनिट स्थापित करनी होगी। कंपनियां पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए बाय-बैक प्रोग्राम चला सकती हैं, जहां वे ग्राहकों से पुराने वाहन खरीदकर उन्हें स्क्रैप कर सकती हैं। इसके बाद, इन वाहनों से प्राप्त स्टील को नए वाहनों के निर्माण में उपयोग किया जाएगा।

    सीपीसीबी इस प्रक्रिया के प्रमाण पत्र जारी करेगा

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) इस प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जब वाहन स्क्रैप किया जाएगा और स्टील निकाला जाएगा, तो सीपीसीबी इस प्रक्रिया के प्रमाण पत्र जारी करेगा। यह प्रमाण पत्र वाहन कंपनियों को यह पुष्टि करने में मदद करेगा कि उन्होंने आवश्यक री-साइक्लिंग मानदंडों का पालन किया है। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर, कंपनियां अपनी री-साइक्लिंग प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकती हैं।

    इन फैसिलिटी की संख्या 100 तक पहुंचाई जाए

    भारत में वर्तमान में 82 रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी हैं। हालांकि, सरकार ने इन फैसिलिटी की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। अगले तीन महीनों में सरकार का प्रयास है कि इन फैसिलिटी की संख्या 100 तक पहुंचाई जाए। इसके लिए, कई राज्यों में नए व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी स्थापित करने के लिए नीतियां बनाई जा रही हैं।

    यदि आपके पास कोई पुरानी कार है |Vehicle Scrappage Policy Benefits

    यदि आपके पास कोई पुरानी कार है, जिसकी उम्र समाप्त हो गई है (जो डीजल गाड़ियों के लिए 10 साल और पेट्रोल गाड़ियों के लिए 15 साल है), तो आप उसे रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग फैसिलिटी में स्क्रैप करवा सकते हैं। जब आप अपनी पुरानी कार को स्क्रैप करेंगे, तो आपको एक सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। इस सर्टिफिकेट का उपयोग आप नई कार खरीदते वक्त डिस्काउंट प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं। यह एक आर्थिक और पर्यावरण दोनों दृष्टिकोण से लाभकारी कदम होगा।

    उर्जा और संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाएगा

    सरकार की यह पहल केवल पर्यावरण के लिहाज से ही नहीं, बल्कि उद्योग के लिए भी फायदेमंद होगी। पुराने वाहनों को स्क्रैप करके री-साइक्लिंग का एक स्थायी और सशक्त तरीका विकसित किया जाएगा। साथ ही, इससे वाहन निमार्ताओं को नई स्टील की खरीद के खर्च में कमी आएगी, और पुराने वाहन मालिकों को भी कुछ लाभ मिलेगा। नए नियमों का उद्देश्य ना केवल प्रदूषण को कम करना है, बल्कि स्टील के पुन: उपयोग से खनन प्रक्रिया को भी प्रभावी बनाना है। इसके साथ ही, प्रदूषण पर नियंत्रण रखने और देश में स्वच्छता बढ़ाने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
    भारत में आॅटो उद्योग के लिए इस नई री-साइक्लिंग नीति के लागू होने से न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि यह देश की स्थिरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। कंपनियों और गाड़ी मालिकों दोनों के लिए यह एक लाभकारी अवसर होगा, जिसमें दोनों पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी फायदा उठा सकेंगे। यह पहल भारतीय आॅटो उद्योग को एक नई दिशा देगी, जहां उर्जा और संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाएगा।