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    ‘राजकिसान साथी’ प्रोजेक्ट को मिला राष्ट्रीय सीआईपीएस इनोवेशन अवार्ड

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    Jaipur News 'राजकिसान साथी' प्रोजेक्ट को मिला राष्ट्रीय सीआईपीएस इनोवेशन अवार्ड

    जयपुर। राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग ने एक और गौरवशाली उपलब्धि हासिल की है। विभाग की ‘राजकिसान साथी’ परियोजना को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सीआईपीएस इनोवेशन अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में आयोजित समारोह में प्रदान किया।

    सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए नवाचारों की सराहना की और भविष्य में भी सभी एप्लिकेशंस में नवीनतम तकनीकों को सम्मिलित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार राजस्थान सरकार के नवाचार और किसान कल्याण के प्रति समर्पण को दर्शाता है। हमारा उद्देश्य किसानों सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से एक ही मंच पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आसानी से, पारदर्शिता के साथ, तेज गति से और घर बैठे मिल सके।

    कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि राजकिसान साथी ने डिजिटल कृषि शासन में एक नया मानक स्थापित किया है। इसने किसानों को सशक्त बनाया है, मानवीय हस्तक्षेप को कम किया है, और सेवाओं की पारदर्शी एवं समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की है। राजस्थान को गर्व है कि प्रदेश ने किसानों और हितधारकों के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित ईकोसिस्टम बनाने में देश में उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    राजकिसान साथी परियोजना: किसानों के लिए क्रांतिकारी कदम

    राज किसान साथी राजस्थान सरकार द्वारा विकसित एक अभिनव सिंगल विंडो ऑनलाइन इंटीग्रेटेड पोर्टल है, जिसे “ईज़ ऑफ डूइंग फार्मिंग” की परिकल्पना को “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” की तर्ज पर साकार करने के लिए शुरू किया गया है। यह पोर्टल कृषि एवं सहायक विभागों के 120 से अधिक ऑनलाइन मॉड्यूल्स पूरी तरह से पेपरलेस और फेसलेस ईकोसिस्टम के माध्यम से उपलब्ध कराता है। राजस्थान इस प्रकार का एकीकृत ढांचा विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बना है।

    राज किसान साथी किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजनाओं, लाइसेंसिंग सेवाओं, गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल सलाह व अन्य सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करता है। इस प्रणाली से 1320 टन कागज की बचत, डीबीटी भुगतान में 33 गुना वृद्धि, रियल-टाइम आवेदन ट्रैकिंग, तथा डिजिटलीकरण के माध्यम से धोखाधड़ी में कमी जैसे उल्लेखनीय लाभ मिले हैं। जियो-टैग्ड वेरिफिकेशन, एआई/एमएल आधारित फसल रोग प्रबंधन, ऑनलाइन लाइसेंसिंग तथा किसानों के दरवाज़े पर सीड मिनीकिट वितरण जैसे नवाचारों से कृषि सेवा वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित हुई है।
    अब तक इस पहल के तहत 73 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं, 3,500 करोड़ रुपए से अधिक डीबीटी के माध्यम से वितरित किए गए हैं, 58,000 से अधिक कृषि छात्राओं को 100 करोड़ रुपए से अधिक की छात्रवृत्तियाँ दी गई हैं, 1 लाख से अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं तथा राजएग्रीक्यूसी ऐप के माध्यम से 1.1 लाख से अधिक नमूनों का परीक्षण किया गया है। इसके साथ ही 1,700 कैपिटल इंवेस्टमेंट्स को सहायता मिली है और 2,500 से अधिक खरीदारों एवं विक्रेताओं को जोड़ा गया है।

    इस पोर्टल की श्रेष्ठ प्रथाओं को डीएआरपीजी की ‘मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस’ पुस्तिका, सीआईपीएस कॉफी टेबल बुकलेट में शामिल किया गया है और 28वें राष्ट्रीय सुशासन सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया है। मध्यप्रदेश एवं उत्तराखंड के अधिकारियों ने भी इस पहल का अध्ययन कर इसे अपनाने में रुचि दिखाई है। राज किसान साथी को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जिनमें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवॉर्ड 2023-24 (सिल्वर कैटेगरी), स्कॉच अवॉर्ड्स, तथा प्रधानमंत्री उत्कृष्ट लोक प्रशासन अवॉर्ड (फाइनलिस्ट) शामिल हैं।