नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को लोगों से अपील की कि वे क्रिसमस और नये साल पर स्वदेशी ही खरीदें। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा, “मुझे खुशी है कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को देश के करोड़ों लोगों ने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। इस साल जब आप त्योहारों की खरीदारी के लिए बाजार में गये होंगे, तो एक बात आप सभी ने महसूस की होगी… देश स्वदेशी की ओर लौट रहा है। लोग अपने मन से भारतीय उत्पादों को चुन रहे थे। इस बदलाव को छोटे से छोटे दुकानदार ने भी महसूस किया। इस बार युवाओं ने भी ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को गति दी। आने वाले कुछ दिन में क्रिसमस और नये वर्ष पर खरीदारी का नया दौर शुरू होने वाला है। मैं आपको फिर याद दिलाउँगा, ‘वोकल फॉर लोकल’ का मंत्र याद रखें। खरीदें वहीं जो देश में बना हो, बेचें वही जिसमें किसी देशवासी की मेहनत लगी हो।”
उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान जब विश्व के कई नेताओं को उपहार देने की बात आयी तो उन्होंने स्वदेशी का ही विकल्प चुना और देशवासियों की ओर से विश्व के नेताओं को दिये गये उपहारों में इस भावना का विशेष ध्यान रखा गया। उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को नटराज की कांस्य प्रतिमा भेंट की गयी जो तमिलनाडु के तंजावुर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी चोल कालीन शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है। कनाडा के प्रधानमंत्री को चांदी के अश्व की प्रतिकृति दी गयी जो राजस्थान के उदयपुर की बेहतरीन शिल्पकला को दशार्ती है। इसी प्रकार जापान के प्रधानमंत्री को चांदी की बुद्ध की प्रतिकृति भेंट की गई। इसमें तेलंगाना और करीमनगर की प्रसिद्ध चांदी के शिल्प की बारीकी का पता चलता है। इटली की प्रधानमंत्री को फूलों की आकृतियों वाला चांदी का दर्पण उपहार में दिया गया जो करीमनगर की ही पारंपरिक धातु शिल्पकला को प्रदर्शित करता है। आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को तांबे की उरली भेंट की गयी जो केरला के मन्नार का एक उत्कृष्ट शिल्प है। उन्होंने कहा, “मेरा उद्देश्य था कि दुनिया भारतीय शिल्प, कला और परंपरा के बारे में जाने और हमारे कारीगरों की प्रतिभा को वैश्विक मंच मिले।”















