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Thursday, April 16, 2026
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    Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी घटाने को लेकर केंद्र से जवाब

    Delhi News
    Sanketik Photo

    Delhi High Court: नई दिल्ली। एयर प्यूरीफायर पर लगाए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को घटाने की मांग से जुड़ी याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। न्यायालय ने केंद्र को 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को निर्धारित की गई है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि जीएसटी दरों में कटौती या समाप्ति जैसे विषयों पर निर्णय केवल जीएसटी परिषद की आमने-सामने होने वाली बैठकों में ही लिया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस तरह के फैसले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नहीं किए जा सकते। Delhi News

    न्यायमूर्ति विकास महाजन और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की अवकाशकालीन पीठ ने केंद्र सरकार को काउंटर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने एयर प्यूरीफायर को चिकित्सकीय उपकरण घोषित करने संबंधी जनहित याचिका पर विस्तृत उत्तर देने के लिए समय मांगा था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत के आदेश में उल्लेख किया गया कि केंद्र सरकार का कहना है कि जीएसटी परिषद की बैठक केवल प्रत्यक्ष रूप से ही संभव है और किसी भी प्रकार का मतदान भी आमने-सामने ही किया जा सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद याचिकाकर्ता को उस पर प्रत्युत्तर देने का अवसर दिया जाएगा।

    केंद्र सरकार ने याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाए

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाए। सरकार का तर्क था कि यह याचिका पक्षपातपूर्ण है और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे उठाने के बावजूद इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पक्षकार नहीं बनाया गया है। सरकार ने कहा कि इस प्रकार की याचिका जीएसटी से जुड़े संवैधानिक ढांचे को प्रभावित कर सकती है।केंद्र के कानून अधिकारी ने यह भी कहा कि जीएसटी परिषद में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सहमति आवश्यक होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित प्रक्रिया के बिना कर दरों में बदलाव का निर्देश देना भविष्य में जटिल स्थितियां उत्पन्न कर सकता है।

    वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के अनुसार एयर प्यूरीफायर पर गलत जीएसटी स्लैब लागू किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि अधिसूचनाओं के अध्ययन से स्पष्ट है कि इन उपकरणों को अलग श्रेणी में रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निर्णय में देरी से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की परेशानियां और बढ़ेंगी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का विस्तृत जवाब प्राप्त किए बिना इस मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी। Delhi News