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    धुंध में धड़ल्ले से अवैध खनन, यमुनानगर में खनिज माफिया के आगे प्रशासन बेबस

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    Pratap Nagar News: धुंध में धड़ल्ले से अवैध खनन, यमुनानगर में खनिज माफिया के आगे प्रशासन बेबस

    प्रतापनगर (सच कहूँ न्यूज़)। Pratap Nagar News: उपमंडल छछरौली के धुंध और लो विजिबिलिटी के इस मौसम में एनजीटी भले ही सख्त गाइडलाइंस जारी करती रही हो, लेकिन यमुनानगर में खनिज माफिया के सामने ये सभी निर्देश बौने साबित हो रहे हैं। अवैध खनन और खनिज परिवहन खुलेआम जारी है और नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अब सरकारी विभागों के रास्तों को भी खनन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रतापनगर क्षेत्र में अवैध खनन ने सारी सीमाएं पार कर ली हैं। पंचायत, एचपीजीसीएल और सिंचाई विभाग के रास्तों का जिस बेखौफ अंदाज में खनिज परिवहन के लिए इस्तेमाल हो रहा है, वह प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। Pratap Nagar News

    ताजा मामला भूड़कलां शिव मंदिर के सामने से निकलने वाले सिंचाई विभाग के रास्ते का है, जिसे अब खनिज सामग्री से भरे वाहनों के लिए खोल दिया गया है। यह वही रास्ता है जो अब तक शांत रहता था और जिस पर पहले कभी भारी खनिज वाहन नहीं चले।नहर और जंगल के बीच से गुजरने वाला यह संकरा रास्ता अब खनन माफिया का नया सेफ रूट बनता जा रहा है। इससे न सिर्फ सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है, बल्कि आसपास विकसित जंगल पर भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

    भूड़कलां से ताजेवाला तक नहर और हाइडिल के लगभग सभी रास्ते लंबे समय से अवैध खनिज परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। बहादुरपुर से हर्बल पार्क के सामने से गुजरने वाला नहर किनारे का रास्ता अवैध खनन से भरे वाहनों और क्रशर जोन की आवाजाही का प्रमुख मार्ग बना हुआ है। वहीं एचपीजीसीएल का भूड़कलां-लालटोपी वाला रास्ता खनन माफिया के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है, जहां दिन के साथ-साथ रातभर भी धड़ल्ले से वाहन दौड़ते हैं।

    अब सिंचाई विभाग के अंतर्गत आने वाला तीसरा रास्ता भी रविवार से खनिज परिवहन के लिए चालू कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि ताजेवाला में सिंचाई विभाग का सब डिविजन कार्यालय मौजूद है, जहां पर्याप्त स्टाफ भी तैनात है, बावजूद इसके अवैध गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही। साफ है कि जब तक नीयत नहीं होगी, तब तक कार्रवाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगी। खनिज यदि हथिनीकुंड की ओर से क्रशिंग जोन में जाना है तो उसके लिए प्रतापनगर-ताजेवाला हाईवे उपलब्ध है, लेकिन जंगल और नहर के बीच से गुजरने वाले इस संकरे रास्ते का इस्तेमाल पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

    जब इस मामले में वन विभाग के कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने जिम्मेदारी सिंचाई विभाग पर डालते हुए कहा कि रास्ता उनका है वह ही कार्रवाई कर सकते हैं। सिंचाई विभाग के एसडीओ ने फोन नहीं उठाया, जबकि जेई ने “पता कर बताने” का आश्वासन देकर बाद में चुप्पी साध ली। Pratap Nagar News

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