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    High Blood Pressure: बिना लक्षणों के जानलेवा बनता ‘साइलेंट किलर, डॉक्टर ने बताया इस तरह बचा जा सकता है….

    High Blood Pressure
    High Blood Pressure: बिना लक्षणों के जानलेवा बनता ‘साइलेंट किलर, डॉक्टर ने बताया इस तरह बचा जा सकता है....

    High Blood Pressure: संदीप दहिया बड़ौत। ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप आज तेजी से बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को भीतर ही भीतर नुकसान पहुंचाती रहती है, इसी कारण इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। ब्लड प्रेशर केवल बुजुर्गों की नहीं, बल्कि युवाओं और कामकाजी वर्ग की भी गंभीर समस्या बन चुका है। अक्षय नर्सिंग होम के एमडी एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रदीप जैन के अनुसार, यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाती है, जबकि मरीज को लंबे समय तक इसकी भनक तक नहीं लगती।

    डॉ. प्रदीप जैन बताते हैं कि ब्लड प्रेशर दो मानों में मापा जाता है सिस्टोलिक और डाइस्टोलिक। हृदय के संकुचित होने पर धमनियों में बनने वाला दबाव सिस्टोलिक कहलाता है, जबकि हृदय के शिथिल होने पर बना दबाव डाइस्टोलिक होता है। सामान्य स्थिति में डाइस्टोलिक प्रेशर 80–90 mmHg और सिस्टोलिक 120 mmHg तक सुरक्षित माना जाता है। 130 से ऊपर सिस्टोलिक प्रेशर लंबे समय तक रहने पर हाइपरटेंशन का रूप ले लेता है। उन्होंने बताया कि ब्लड प्रेशर को खतरनाक बनाने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि इसके कोई निश्चित लक्षण नहीं होते। हालांकि कुछ लोगों में सिर भारी रहना, चक्कर आना, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, आंखों के आगे अंधेरा छाना और कभी-कभी नाक से खून आना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।

    डॉ. प्रदीप जैन के अनुसार, अत्यधिक नमक का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा मोटापा, मधुमेह, धूम्रपान, शराब सेवन, शारीरिक श्रम की कमी, मानसिक तनाव, मोबाइल-स्क्रीन पर अधिक समय, अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी भी उच्च रक्तचाप को जन्म देती है। उन्होंने चेताया कि अनियंत्रित ब्लड प्रेशर से शरीर में गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स उत्पन्न हो सकते हैं। इनमें ब्रेन हेमरेज, लकवा या अधरंग, दिमाग की नस में ब्लॉकेज, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, आंखों की रोशनी कमजोर होना या रेटिना में रक्त जमना, किडनी फेल होना जैसी जानलेवा स्थितियां शामिल हैं।

    डॉ. जैन ने जागरूक करते हुए कहा कि 40 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच अवश्य करानी चाहिए, वहीं मोटापा या शुगर से ग्रसित लोगों को महीने में एक बार जांच करानी चाहिए। दवा केवल चिकित्सक की सलाह से ही लें और बिना परामर्श दवा बंद न करें।

    उन्होंने बताया कि रोजाना 30 मिनट तेज चाल से पैदल चलना, नमक 5 ग्राम से कम लेना, तली-भुनी चीजों से परहेज, हरी सब्जियां व फल का सेवन, पर्याप्त नींद और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर ब्लड प्रेशर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। डॉ. प्रदीप जैन ने कहा कि ब्लड प्रेशर को हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है। समय पर जांच, सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव ही इसका सबसे बड़ा उपचार है।”