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Saturday, March 14, 2026
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    Sonam Wangchuk’s NSA Detention: सोनम वांगचुक की एनएसए हिरासत को लेकर गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला

    Sonam Wangchuk
    Sonam Wangchuk's NSA Detention: सोनम वांगचुक की एनएसए हिरासत को लेकर गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला

    Sonam Wangchuk’s NSA Detention: जम्मू। केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk की हिरासत को समाप्त करने का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि विचार-विमर्श के बाद उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक को National Security Act (India) के प्रावधानों के तहत सितंबर 2025 में हिरासत में लिया गया था। यह कदम उस समय उठाया गया था जब Ladakh के Leh क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। जिला प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की थी। Sonam Wangchuk

    सरकारी बयान के अनुसार, वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। अब तक वह हिरासत की निर्धारित अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर चुके थे। वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार लद्दाख के विभिन्न सामाजिक समूहों, सामुदायिक प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के साथ लगातार संवाद कर रही है। सरकार का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों की चिंताओं और अपेक्षाओं को समझते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।

    बंद और विरोध प्रदर्शनों के कारण सामान्य जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है

    मंत्रालय ने कहा कि हाल के महीनों में बंद और विरोध प्रदर्शनों के कारण सामान्य जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसका असर विशेष रूप से छात्रों, रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं, व्यापारियों, पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों और पर्यटकों पर पड़ा है। सरकार का कहना है कि क्षेत्र में शांति और विश्वास का वातावरण बनाना प्राथमिकता है। इसके लिए सभी पक्षों के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा। उच्चस्तरीय समिति और अन्य मंचों के माध्यम से लद्दाख से जुड़े मुद्दों के समाधान का प्रयास जारी रहेगा।

    गौरतलब है कि सितंबर 2025 में लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाएं भी सामने आई थीं। उस समय प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग लद्दाख को छठी अनुसूची के अंतर्गत विशेष संवैधानिक सुरक्षा और पूर्ण राज्य का दर्जा देने से जुड़ी थी। हिंसा के दौरान कई लोग घायल हुए थे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़े थे। Sonam Wangchuk